सहारा समूह को लगा तगड़ा झटका

स्रोत: न्यूज़ नेटवर्क      तारीख: 10-Oct-2017

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के डीजीपी को निर्देश दिया है कि वे 48 घंटे में सहारा समूह की संपत्ति एंबी वैली को ऑफिशियल लिक्विडेटर को सौंप दी जाए। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने ऑफिशियल लिक्विडेटर को निर्देश दिया कि वे एंबी वैली को अपने हाथ में लें और बांबे हाईकोर्ट के जज जस्टिस ओका की निगरानी में उसकी नीलामी प्रक्रिया को जारी रखें। कोर्ट से साफ कर दिया कि कोई भी व्यक्ति इस प्रक्रिया में बाधा पहुंचाएगा तो वह कोर्ट की अवमानना करेगा।

सहारा समूह के खिलाफ सेबी की अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान सेबी ने कहा कि एंबी वैली की नीलामी असफल रही है क्योंकि कोई भी निविदाकर्ता खरीदने नहीं पहुंचा। सहारा ने एंबी वैली की नीलामी से ठीक पहले उसमें ताला लगा दिया और पुणे पुलिस को इसकी सूचना दी।

सेबी ने 10 अक्टूबर को दायर अपनी याचिका में कहा कि सहारा एंबी वैली प्रोजेक्ट की नीलामी में बाधाएं खड़ी कर रहा है। सेबी की ओर से वकील प्रताप वेणुगोपाल ने जस्टिस रंजन गोगोई को बताया कि सहारा एंबी वैली की नीलामी प्रक्रिया में बाधा डाल रहे हैं। सेबी ने अपनी याचिका में कहा है कि एंबी वैली लिमिटेड ने नीलामी से कुछ दिन पहले ही ताला लगा दिया और पुलिस को लिखा की पुलिस एंबी वैली की सुरक्षा करे क्योंकि इसके लिए कंपनी के पास पैसे नहीं हैं। इसके बाद पुलिस ने एंबी वैली की सुरक्षा का जिम्मा संभाल लिया है। इसकी वजह से नीलामी प्रक्रिया में रुकावट आ गई है।

पिछले 11 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने एंबी वैली की नीलामी का आदेश दिया था। कोर्ट ने ऑफिशियल लिक्विडेटर बांबे हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को नीलामी के वक्त मुंबई में मौजूद रहने के निर्देश दिए थे। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा था कि सहारा समूह के मालिक सुब्रत राय ने कोर्ट को प्रयोगशाला समझ रखा है। उन्होंने कोर्ट को प्रयोगशाला समझ कर इससे खेलने की कोशिश की है। उन्होंने कानून का मजाक बनाया है। उन्हें लग रहा था कि वे वेंटिलेटर पर जिंदा रह जाएंगे, लेकिन वेंटिलेटर से भी ज्यादा बड़ी जिंदगी नहीं मिलती है। कोर्ट ने कहा कि अब उन्हें कोई मौका नहीं दिया जा सकता है। इसके पहले उन्हें काफी मौका दिया जा चुका है।

सहारा समूह के वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि अब केवल 8657 करोड़ रुपये बकाया हैं। ये राशि हम दो महीने में जमा कर देंगे। इसके लिए उन्होंने कोर्ट को टाइमलाइन भी बताया। उन्होंने इन पैसों को जमा करने के लिए समय की मांग की। उनकी इस दलील का सेबी के वकील अरविंद दातार और प्रताप वेणुगोपाल ने ये कहते हुए विरोध किया कि ये देर करने का नाटक है। कोर्ट के एमिकस क्युरी शेखर नफड़े ने भी सेबी के वकीलों का समर्थन करते हुए कहा की एनफ इज एनफ।