धर्म में जीना सरल किन्तु अधर्म में जीना कठिन है

स्रोत: न्यूज़ नेटवर्क      तारीख: 14-Oct-2017

-राम कथा के सातवें दिन मां कनकेश्वरी ने कहा
ग्वालियर। मनुष्य को सभी प्रकार से अभ्युदय होना चाहिए। मनुष्य का धर्म में जीना सरल है, लेकिन अधर्म में जीना अत्यंत ही कठिन है। धर्म के मार्ग पर चलने वाले कभी शिकायत नहीं करते। मीरा और पांडव इन लोगों ने धर्म के मार्ग पर चलते हुए आई कठिनाइयों की कभी भी भगवान से शिकायत नहीं की और उन कठिनाइयों को सहन किया। यह विचार राष्ट्र संत मां कनकेश्वरी देवी ने शुक्रवार को रामलीला मैदान मुरार में आयोजित श्रीराम कथा के सातवें दिन शुक्रवार को व्यक्त किए।

मां कनकेश्वरी देवी ने कहा कि मनुष्य में गुणों का भण्डार है। आत्मा अनंत गुणों का रूप है। व्यक्ति स्वयं की श्रेष्ठता, स्वयं की शक्तियों, स्वयं की सुंदरता और स्वयं की महानता से अनभिज्ञ है क्योंकि क्रिया में दोष है, इसलिए उसे अंदर के गुण दिखाई नहीं देते हैं। हमें अपनी आत्मा से परदा हटाने की जरूरत है। मां कनकेश्वरी देवी ने श्रीराम कथा में श्रीराम द्वारा धनुष तोड़ने, सीताजी द्वारा जयमाला डालने, परशुरामजी के आगमन का जिक्र करते हुए लक्ष्मण-परशुराम संवाद का चित्रण बहुत ही सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया।

इन्होंने किया पोथी पूजन:-

केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर की धर्मपत्नी किरण सिंह, पुत्र देवेन्द्र प्रताप सिंह, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री भगवान सिंह यादव, विधायक प्रदीप अग्रवाल, पूर्व विधायक बाबूलाल मेवरा, लता ऐलकर, अशोक जादौन, मुन्नालाल गोयल, रमन शर्मा, आनंद दीक्षित, प्रेमसिंह राजपूत आदि ने पोथी पूजन कर आरती की।

आज बंदियों को सुनाएंगी श्रीराम कथा

कारगिल शहीद सरमन सिंह शिक्षा संस्थान के अध्यक्ष एवं साडा अध्यक्ष राकेश जादौन ने बताया कि राष्ट्र संत मां कनकेश्वरी देवी शनिवार 14 अक्टूबर को प्रात: 9.30 बजे से केन्द्रीय जेल ग्वालियर में बंदियों को श्रीराम कथा सुनाएंगी, जबकि दोपहर एक से शाम पांच बजे तक रामलीला मैदान में श्रीराम कथा का वाचन करेंगी।

यह भी कहा मां कनकेश्वरी देवी ने

-प्रभु को वह व्यक्ति वंदनीय है, जो प्रकृति के लिए कार्य करता है।
-भगवान श्रीकृष्ण ने भूमि के भार को कम किया है।
-धर्म की हानि पर मौन नहीं रहना चाहिए।
-जाति पर क्रोध नहीं होना चाहिए।
-श्रीराम कथा भगवान के अवतार की कथा है।
-हमारे पास जो भी जीव आए, उसका आशीर्वाद अवश्य लेना चाहिए।