प्रकाश जावडेकर ने कहा - पाइका बिद्रोह को मिलेगा इतिहास में जगह

स्रोत: न्यूज़ नेटवर्क      तारीख: 25-Oct-2017

नई दिल्ली। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावडेकर ने पाइका विद्रोह के 200 साल होने पर आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि साल 1817 में हुए पाइका विद्रोह को अब इतिहास की पाठ्यपुस्तकों में जगह मिलने जा रही है। 1817 के पाइका विद्रोह को अगले सत्र से इतिहास की पाठ्य पुस्तकों में 'प्रथम स्वतंत्रता संग्राम' के रुप में स्थान मिलेगा। अभी तक 1857 का स्वाधीनता संग्राम जिसे सामान्य तौर पर हम भारत का पहला संग्राम माना जाता है।

प्रकाश जावडेकर ने कहा कि साल 1817 में हुए पाइका विद्रोह ही भारत का पहला विद्रोह था। साथ ही उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार विद्रोह को दो सौ साल होने पर समारोह आयोजित करने के लिए 200 करोड़ रुपये देगी। सरकार के इस फैसले के बाद पाइका विद्रोह को अंग्रेजों के खिलाफ होने वाला पहला स्वतंत्रता संग्राम माना जाएगा।

इससे पहले ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने केंद्र से अपील की थी। कि पाइका विद्रोह को ब्रिटिश शासन के खिलाफ प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के रुप में मान्यता देना चाहिए, क्योंकि यह 1857 क्रांति से चार दशक पहले हुआ था।

क्या था पाइका विद्रोह

साल 1817 में ओडिशा में हुए पाइका बिद्रोह ने पूर्वी भारत में कुछ समय के लिये ब्रिटिश राज की जड़े हिला दी थीं। मूल रूप से पाइका ओडिशा के उन गजपति शाषकों के किसानों का असंगठित सैन्य दल था जो युद्ध के समय राजा को सैन्य सेवायें मुहाये कराते थे और शांतिकाल में खेती करते थे। इन लोगों ने 1817 में बक्शी जगबंधु बिद्याधर के नेतृत्व में ब्रिटिश राज के विरुद्ध बगावत का झण्डा उठा लिया।