ग्रंथों का ज्ञान नहीं है तो वह ज्ञान अपूर्ण

स्रोत: न्यूज़ नेटवर्क      तारीख: 09-Oct-2017

ग्वालियर। आध्यात्मिक ज्ञान और ग्रंथ एक दूसरे के पूरक हैं। यदि ग्रंथों का ज्ञान नहीं है तो वह ज्ञान अपूर्ण है। श्रीरामचरित मानस एक आशीर्वादात्मक ग्रन्थ है,इसके पठन-पाठन से लौकिक एवं पारमार्थिक अनेक कार्य सिद्ध होते हैं। यह प्रवचन रविवार को मुरार के श्रीरामलीला मैदान में आयोजित श्रीराम कथा के दूसरे दिन राष्ट्रसंत कनकेश्वरी देवी ने दिए। उन्होंने कहा कि सत्य ही दुर्लभ है। आप कल कुछ नहीं थे आज सब कुछ हो। कल आपको कोई नहीं जानता था आज सब जानते हैं। यह प्रारब्ध का खेल है। एक बार सत्य से मिल गए तो समझ लो वहां से कोई गिरता नहीं है। मनुष्य के लिए दुर्लभ कोई चीज है तो वह सत्य है।

उन्होंने कहा कि सत्संग से बढ़कर कोई परोपकार नहीं है। जिसकी जरूरत है उसकी मदद करना चाहिए। भगवान की कथा का आयोजन हो इससे बड़ा दूसरा परोपकार नहीं, क्योंकि न तो वक्ता जानता है कितनों का कल्याण हो रहा है और न ही यजमान जानता है कितनों का जीवन जाग्रत हुआ। तुलसीदास व अन्य महापुरुषों ने ग्रंथ देकर इस धरा धाम पर बड़ा उपकार किया है।   

राष्ट्रसंत कनकेश्वरी देवी ने गुरु की महत्ता बताते हुए कहा कि गुरुकृपा से ही ज्ञान मिलता है, गुरु अंहकार को तोड़ देते हैं और जब अहंकार टूट जाता है तो शेष रह जाता है सिर्फ ज्ञान।  गुरु व्यक्ति की बुद्धि का संबंध आत्मा से कर देते हैं और फिर आत्मा का संबंध भगवान से हो जाता है। गुरुत्व नियंत्रण है, उम्र बढ़ने के बाद भी गुरुत्व जिंदा बना रहता है। उन्होंने उदाहारण देकर बताया कि जिस प्रकार एक हजार वर्ष पुराने सोने और आज के सोने के मूल गुणवत्ता  में किसी भी प्रकार का अंतर नहीं होता है,उसी प्रकार गुरुत्व का स्तर भी दिन-प्रतिदिन बढ़ता जाता है। उन्होंने और स्पष्ट करते हुए कहा कि भगवान की दी हुई आंख से हम संसार देखते हैं और गुरु की कृपा से हम भगवान को देख सकते हैं।  

इन्होंने की आरती

दंदरोआ धाम के महंत रामदास महाराज,मुख्य यजमान तथा केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर की धर्मपत्नी किरण सिंह, पुत्र देवेन्द्र प्रताप सिंह, बहन मंजू सिंह सिकरवार, पूर्व विधायक मुन्ना सिंह भदौरिया , सुरेन्द्र सिंह राठौर (ओरछा), धीरसिंह तोमर, महाराज सिंह पटेल, भूपेन्द्र जैन, उपेन्द्र बैस आदि ने रामायण की आरती की।  कथा का संचालन महेश मुदगल ने किया।