मुख्यमंत्री के कार्यालय में लागू नहीं होता आरटीआई

स्रोत: न्यूज़ नेटवर्क      तारीख: 26-Dec-2017

-सूचना आयोग के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय पहुंची सरका
भोपाल। मप्र सरकार सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जनता को जानकारी देने को लेकर ज्यादा गंभीर नहीं है। यही कारण है कि अब तक  मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव कार्यालय में सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत लोगों को जानकारी मुहैया कराने के लिए लोक सूचना अधिकारी की नियुक्ति तक नहीं की गई है। इन दोनों कार्यालयों से सूचना नहीं मिलने पर पिछले महीने राज्य सूचना आयुक्त ने राज्य सरकार को निर्देश दिए थे कि 20 दिसंबर तक दोनों कार्यालयों में लोक सूचना अधिकारियों की तैनाती की जाए। सूचना आयुक्त के इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार हाईकोर्ट पहुंच गई है।

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा आरटीआई के तहत मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव कार्यालय से जुड़ी सूचनाएं मुहैया नहीं कराए जाने पर आवेदक अजय दुबे ने राज्य सूचना आयोग में अपील की थी। सुनवाई के दौरान दुबे ने सूचना आयुक्त को बताया कि मुख्यमंत्री कार्यालय एवं मुख्य सचिव कार्यालय में लोक सूचना अधिकारी ही नहीं है। ऐसे में सामान्य प्रशासन विभाग के लोक सूचना अधिकारी पर दोनों बड़े कार्यालयों से सूचना मुहैया कराए जाने की जिम्मेदारी है, लेकिन सीएमओ एवं मुख्य सचिव कार्यालय द्वारा आरटीआई के किसी भी आवेदन की सूचना नहीं दी जाती है। दुबे ने 9 नवंबर को सुनवाई के दौरान कहा था कि सीएमओ एवं सीएस कार्यालय में लोक सूचना अधिकारी नियुक्त किए जाएं। जिस पर आयोग ने आदेश जारी किया था कि 20 दिसंबर तक सूचना अधिकारी नियुक्त किए जाएं। लेकिन राज्य सरकार ने आयोग के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करने का फैसला दिया है। इसके लिए 7 दिसंबर को प्रभारी अधिकारी तैनात कर दिया है। साथ ही सामान्य प्रशासन विभाग ने सूचना आयोग को पत्र लिखकर कहा है कि हाईकोर्ट से फैसला होने तक पिछले आदेश को स्थगित किया जाए।

सीएमओ और मुख्य सचिव कार्यालय में अधिकारियों की फाइलें मौजूद रहती हैं। अन्य जानकारी भी रहती है। जीएडी यहां से जानकारी निकलवाने में असमर्थ रहता है। इन दोनों कार्यालयों के अधिकारी 13 महीने का वेतन पाते हैं। सरकार का सूचना आयोग के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाना पैसे की बर्बादी है।
अजय दुबे, संयोजक सूचना का अधिकार आंदोलन