रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में नहीं किया कोई बदलाव

स्रोत: न्यूज़ नेटवर्क      तारीख: 06-Dec-2017

मुंबई/नई दिल्ली। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने बुधवार को मौद्रिक नीति की घोषणा की, जिसमें रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करते हुए उसे 6 फीसदी पर ही रखा। इसी तरह रिवर्स रेपो रेट 5.75 फीसदी और बैंक रेट 6.25 फीसदी रहा। हर दो माह पर होने वाली मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद ये घोषणा हुई। छह सदस्यीय समिति में से पांच सदस्यों ने इन फैसलों का स्वागत किया| एक सदस्य ने 25 बेसिस पाइंट कटौती की अनुशंसा की थी।

बुधवार को रिजर्व बैंक के रेपो रेट एवं अन्य दरों को लेकर घोषणा चौकाने वाली नहीं रही, क्योंकि बहुत ही कम लोगों को आरबीआई द्वारा इस मौद्रिक नीति घोषणा में दरों में कटौती की उम्मीद थी। हुआ भी वैसा ही। अपने मौद्रिक नीति घोषणा में आरबीआई ने कहा कि हरिकेन के बावजूद यूएस अर्थव्यवस्था मजबूत रही और पिछले तीन साल में 2017 की तीसरी तिमाही में सबसे ज्यादा ग्रोथ देखी गई। इसी तरह बेरोजगारी का प्रतिशत 17 साल में सबसे कम 4.1 फीसदी रहा। इसी तरह यूरोपीय अर्थव्यवस्थाएं भी मजबूती के साथ बढ़ती दिखाई दी। एशियाई आर्थिक परिदृश्य में जापानी अर्थव्यवस्था में विस्तार देखा गया। इस तरह वैश्विक आर्थिक संकेत सकारात्मक दिखे हैं।

घरेलू परिदृश्य में लगातार पांच तिमाही में गिरावट के बाद चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में विकास देखा गया, जो औद्योगिक गतिविधियों में तेजी के चलते देखी गई। सेवा क्षेत्र में वित्तीय सेवाएं, बीमा, रियल इस्टेट सहित कुछ सेक्टर में सुस्ती देखी गई। रेरा एवं जीएसटी के चलते रियल इस्टेट सेक्टर में कमजोरी ही दिखाई दी। कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (सीपीआई) अक्टूबर में सात महीनों के सबसे उच्चतम स्तर पर रहा। अक्टूबर, नवम्बर माह में व्यवस्था में अतिरिक्त नकदी में कमी होती दिखी। इसी तरह त्यौहार सीजन के चलते दिसम्बर 1, 2017 तक प्रचलन में नकदी बढ़कर 736 अरब हो गई।

अक्टूबर में द्विमासिक बयान ने केंद्र सरकार द्वारा गृह किराया भत्ता (एचआरए) में वृद्धि के प्रभाव सहित, इस वर्ष की दूसरी छमाही में मुद्रास्फीति को 4.2-4.6 प्रतिशत के बीच बढ़ने का अनुमान लगाया है। अनुमानों के मुताबिक मुख्य मुद्रा मुद्रास्फीति के परिणाम कई कारकों से प्रभावित हुए। सबसे पहले, 2017-18 की पहली तिमाही में, खाद्य और ईंधन को छोड़कर, मुद्रास्फीति में सुधार उलट हुआ है। यह एक जोखिम है कि यह ऊपरी दिशा में निकट-अवधि में जारी रह सकता है। दूसरा, केंद्र सरकार द्वारा एचआरए के प्रभाव की उम्मीद दिसंबर में सबसे बड़ी होगी। विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा एचआरए के बढ़ने का प्रभाव 2018 में आवास मुद्रास्फीति को आगे बढ़ा सकता है, साथ ही परिचर दूसरे क्रम प्रभावों के साथ। तीसरा, अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में हाल की वृद्धि, खासकर ओपेक के अगले साल के माध्यम से उत्पादन में कटौती को बनाए रखने के फैसले के कारण हो सकती है। ऐसे परिदृश्य में भू-राजनीतिक विकास के कारण किसी भी प्रतिकूल आपूर्ति कीमतों को और भी आगे बढ़ा सकती है। सब्जियों की कीमतों में हालिया वृद्धि के बावजूद, कुछ महीनों में मौसमी मॉडरेशन की उम्मीद है क्योंकि सर्दियों की आवक में कमी आती है। दालों की कीमतों में गिरावट का रुख दिख रहा है। जीएसटी परिषद ने अपनी पिछली बैठक में कई खुदरा सामान और सेवाओं को कम कर ब्रैकेट्स में लाया है। कुल मिलाकर, मुद्रास्फीति का इस साल की तीसरी तिमाही में 4.3-4.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

मौद्रिक नीति समिति के छह सदस्यों में डॉ चेतन घाटे, डॉ पामी दुआ, डॉ माइकल देवव्रत पात्रा, डॉ विरल आचार्य, डॉ. रवींद्र एच ढोलकिया और डॉ. उर्जित पटेल मौजूद थे। इनमें से डॉ चेतन घाटे, डॉ पामी दुआ, डॉ माइकल देवव्रत पात्रा, डॉ विरल आचार्य और डॉ. उर्जित पटेल सहित पांच सदस्य मौद्रिक नीति के फैसले के पक्ष में थे, जबकि डॉ. रवींद्र एच ढोलकिया ने दरों में 25 बेसिस पाइंट की कमी के लिए मतदान किया। मौद्रिक नीति समिति की अगली बैठक 06-07 फरवरी, 2018 को तय की गई है। पिछली बैठक अक्टूबर, 2017 में हुई थी।