नौ दिनी गुप्त नवरात्रि 24 से

स्रोत: न्यूज़ नेटवर्क      तारीख: 21-Jun-2017

गुप्त नवरात्रि और शनिचरी अमावस्या का रहेगा अद्भुत संयोग

ग्वालियर, न.सं.। मां दुर्गा का नौ-दिवसीय साधना पर्व गुप्त नवरात्रि 24 जून शनिवार से प्रारंभ होने जा रहा है जो दो जुलाई तक रहेगा। यह साधना का सबसे उत्तम काल है। ज्योतिषाचार्य पं. सतीश सोनी के अनुसार सतयुग में चैत्र नवरात्रि, द्वापर में माघ नवरात्रि, कलयुग में अश्विनी नवरात्रि और त्रेता युग में आषाढ़ नवरात्रि की प्राथमिकता रहती है।

ज्योतिषाचार्य के अनुसार प्रतिपदा से नवमी तक महालक्ष्मी, सरस्वती और दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है। यह वर्ष 2017 का प्रथम गुप्त नवरात्रि है। गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की साधना की जाती है। गुप्त नवरात्रि में दुर्गा सप्तसती का पाठ, बीज मंत्रों का जाप व शक्ति की साधना की जाती है। इस दौरान बेहद ही कड़े नियमों के साथ पूजा अर्चना की जाती है।

यह है पूजा की विधि

गुप्त नवरात्रि की पूजा अन्य नवरात्रि की तरह की जाती है। इस दौरान नौ दिन का उपवास किया जाता है। गुप्त नवदुर्गा के प्रथम दिन घट की स्थापना की जाती है। इसके बाद प्रतिदिन सुबह व शाम के समय मां दुर्गा की पूजा, आरती, प्रसाद आदि का वितरण किया जाना चाहिए। गुप्त नवरात्रि का समापन कन्या पूजन के साथ होता है।

गुप्त नवरात्रि की प्रमुख दस देवियां

कई साधक दस महाविद्या की तंत्र साधना के लिए मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुन्दरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्न महता, त्रिपुरी भैरवीं, मां धूमावती, माता बगुला मुखी, मातंगी व कमला देवी की पूजा अर्चना की जाती है।
शनिचरी अमावस्या और गुप्त नवरात्रि का अद्भुत योग दिलाएगा सुख शांति:- वर्ष 2017 की पहली शनीचरी अमावस्या 24 जून को है। इसके बाद वर्ष 2017 की दूसरी शनीचरी अमावस्या 12 नवम्बर को रहेगी। 24 जून को सुबह 07.54 से रविवार सुबह 06.09 बजे तक 24 घंटे तक शनिचरी अमावस्या का लाभ जातकों को मिलता रहेगा। इस बार इस अद्भुत संयोग का लाभ जिन लोगों को संतान नहीं हो रही है वे अगर इस दिन पितृ शांति का उपवास करें तो बेहद ही लाभ होगा, क्योंकि इस समय किए गए उपवास बेहद ही लाभ प्रदान करते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार वृश्चिक, धनु, मकर पर साढ़े साती और वृषभ और कन्या राशि पर ढैय्या है। इस पांच राशि वालों को इस दिन पूजा करने से शनि पीड़ा से राहत मिलेगी।

क्या करें इस दिन

इस दिन शनि का तेल से अभिषेक करना चाहिए। इस दिन काला तिल, काला उड़द, काला कपड़ा और नीले फूल का दान करना चाहिए और काले कुत्ते को कुछ खिलाना भी लाभदायक है। वहीं पितृ प्रसन्नता के लिए इस दिन पीपल के पेड़ के नीचे पांच तरह की मिठाई रखकर दीपक जलाकर प्रणाम करना चाहिए।