प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विदेश नीति में आया आमूलचूल परिवर्तन: डॉ. सिंह

स्रोत: न्यूज़ नेटवर्क      तारीख: 17-Jul-2017

भारतीय विदेश नीति पर दो दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का समापन

ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान एवं लोकप्रशासन अध्ययनशाला में  शांति विकास और सांस्कृतिक एकता परिषद द्वारा भारत की विदेश नीति विषय पर आयोजित की जा रही दो दिवसीय राष्टÑीय संगोष्ठी का रविवार को समापन किया गया। जिसकी अध्यक्षता जे.एन.यू. के प्रो. विश्वनाथ ठाकुर ने की। संगोष्ठी के प्रथम तकनीकी सत्र के मुख्य वक्ता दिल्ली विवि के डॉ. सुधीर सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत की विदेश नीति के प्रमुख आयाम एक्ट ईस्ट पॉलिसी में अवसर एवं चुनौती में यह स्पष्ट किया है कि भारत की विदेश नीति में प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पूर्व एशियन देशों के संदर्भ में आमूलचूल बदलाव आया है।

मोदी ने समकालीन विश्व राजनीतिक में महत्वपूर्ण परिवर्तन एवं सुरक्षा परिदृष्य को समझते हुए एक्ट ईस्ट नीति को लागू ही नही किया बल्कि इसे सक्रियता से लागू करने की पहल की है। वहीं  प्रो. एम.पी.मोदी ने कहा है कि भारत का सांस्कृतिक संबंध इन देशों के साथ प्राचीन काल से रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक्ट ईस्ट नीति के द्वारा भारत चीन की शक्ति को अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में सीमित करने का प्रयास करेगा एवं उन्होने मोदी सरकार द्वारा इस दिशा में किये गये प्रयासों को सराहा और जोर दिया कि स्कोप क्रियान्वयन के स्तर पर और मजबूती से लागू किया जा सकता है। जबकि राजनीति विज्ञान के प्रो. ए.पी.एस.चैहान ने इस अवसर पर कहा कि भारत को हिन्द सागर के अपने इलाके का खास ध्यान रखना चाहिए। सामुद्रिक नौवहन को समुद्री लुटेरों से रक्षा सहित तटीय देशों से संबंधो में नई प्रगाढ़ता लाने की जरूरत पर उन्होनें बल दिया। उनका मानना है कि भारत हिन्द महासागर में अपनी मजबूत उपस्थिति को दर्ज कराकर वैश्विक पटल पर अपनी उपस्थिति को काफी महत्वपूर्ण तरीके से आगाज कर सकता है।  इस अवसर पर डॉ.सरोज मोदी, डॉ. आभा वाजपेयी, प्रो. नलिन महापात्रा दिल्ली, प्रो. विश्वनाथ ठाकुर दिल्ली, प्रो. लियाकत खॉन मुम्बई, डॉ.एस.एस.सिकरवार, डॉ. दीपक वर्मा , डॉ. डी.के.सिंह, डॉ.सीमा सोनी देवास, विजय यादव आदि उपस्थित थे।