नयति हॉस्पिटल : डाक्टर करते हैं मरीजों का इलाज और पुलिस करती है तीमारदारों का उपचार

स्रोत: न्यूज़ नेटवर्क      तारीख: 22-Jul-2017
* अस्पताल परिसर के अंदर पुलिस स्टेशन देख भयभीत हो जाते है मरीज और उनके परिजन 
 * पुलिस स्टेशन खोले जाने की वैधानिकता पर उठाये सवाल, डीजी से तत्काल हटाने की मांग 
  
 मथुरा/रमेश गुप्ता। नयति अस्पताल का एक और करिश्मा आपको चौंका देगा। यहां अस्पताल प्रशासन ने परिसर के अंदर ही पुलिस स्टेशन खुलवा लिया है। रोगों से घबराये असहाय मरीज और तीमारदार जब इस अस्पताल परिसर में प्रवेश करते हैं तो पुलिस को देख परेशान हो जाते है। बताया जाता है कि जब तीमारदार अस्पताल के चिकित्सक और कर्मचारियों की लापरवाही के खिलाफ अपनी पीड़ा जताते है तो पुलिस उनका उपचार कर देती है। 
एक निजी अस्पताल परिसर जहां रोगों से सताये हुए लोग आते है। वहां पुलिस स्टेशन की मौजूदगी सभी को हैरान कर देती है। इसकी एक बड़ी वजह नयति अस्पताल में मरीज और उनके परिजनों के अस्पताल प्रशासन से आये दिन होने वाले झगड़े भी हो सकते हैं। जिन्हें एक तरफ तो अस्पताल प्रशासन द्वारा छुपाया जाता है और दूसरी ओर इन झगड़ों से निपटने के लिये ही नयति अस्पताल के कर्ताधर्ताओं ने अस्पताल के अंदर ही पुलिस स्टेशन खुलवा लिया है। 
 
बहरहाल आरटीआई कार्यकर्ता रामगोपाल ने इस चौकी की वैधानिकता पर सवाल उठाये है। प्रदेश के पुलिस महानिदेशक सुलखान सिंह को पत्र लिखा है। इस पत्र में कहा गया है कि सपा की अखिलेश सरकार के कार्यकाल में पुलिस विभाग के अफसरों द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित नयति अस्पताल के परिसर के अंदर पुलिस चौकी खोल दी गई थी। 
 
एक प्राइवेट अस्पताल के परिसर के अंदर उत्तर प्रदेश सरकार की पुलिस चौकी के खोले जाने से सरकार और पुलिस की छवि भी धूमिल हो रही है। पुलिस चौकी के खोले जाने के मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने, दोषी पुलिस और प्रशासनिक अफसरों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करते हुए तथा पुलिस चौकी को हटाने की मांग की गई है। 
 
बढ़ते अपराधों के बीच निजी अस्पताल की चौकीदारी 
 
शहर में अपराधी बेलगाम हो रहे है। हत्या, लूट, डकैती और बलात्कार हो रहे है और पुलिस असहाय नजर आती है। एक तरफ पुलिस तर्क देती है कि आबादी के लिहाज से पुलिसकर्मियों की संख्या कम है और दूसरी ओर एक निजी अस्पताल परिसर के अंदर पुलिस चौकी खोलकर उसमें पुलिसकर्मियों की तैनाती कर दी जाती है। ऐसे में पुलिस और अफसरों की कार्यशैली पर सवाल उठना लाजिमी है।