ज्ञान लेने में नहीं बल्कि देने में महानता है : आचार्य विनम्र सागर

स्रोत: न्यूज़ नेटवर्क      तारीख: 09-Aug-2017

ग्वालियर। आज हर आदमी की ज्ञान पाने की ख्वाहिश तो है, लेकिन ज्ञान को यथायोग्य आदर देने की नहीं है। यह बहुत ही सोचनीय विषय है कि किसी से ज्ञान पाना कर्ज है, जबकि ज्ञान देना दिव्यता है। कर्ज जब लिया जाता है तो उससे पूर्व जान, पहचान, विश्वास और श्रद्धा को जन्म देना पड़ता है। साथ ही जिससे कर्ज ले रहें है उसके सामने अपना सिर झुकाकर रखना पड़ता है। ज्ञान लेने में नहीं बल्कि ज्ञान देने में महानता है, क्योंकि लेने वाला दरिद्री, अज्ञानी, अबोध भी हो सकता है, लेकिन देने वाला दरिद्री नहीं दानी होगा। उक्त उद्गार आचार्य विनम्र सागर ने मंगलवार को तेरहपंथी धर्मशाला में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

आचार्यश्री ने कहा कि यदि आपके अंदर शिष्यत्व है तो गुरू मिट्टी का भी हो तो तुम्हें बोध दे सकता है। यदि शिष्यत्व नहीं है तो गुरू क्या भगवान राम भी तुम्हारे सामने आदर्श सहित जीवन लेकर आ जाएं तो भी तुम उन्हें स्वीकारने को तैयार नहीं हो पाओगे। कोई समझता हो कि शास्त्रों को पढ़ने से ज्ञान आता है, तो बिना गुरू के शास्त्र पढ़ना ज्ञानवर्धक नहीं, बल्कि अहंकार और झूठ वर्धक है। विनम्रता एक ऐसा सुंदर गुण है जिसको हर आदमी अच्छी दृष्टि से देखता है और इस गुण में हर वस्तु प्रवेश करने के लिए सहजता से तैयार है। यदि देखा जाए तो ज्ञान ही नहीं दुनियां की कोई भी वस्तु पाने के लिए विनम्रता जरूरी है विनम्रता के गुण आते ही हमारे मस्तिष्क की कोशिकाओं में तीव्र ऊर्जा भर देती है। जिससे हमें कार्य में सफलता के चिन्ह दिखाई देने लगते है। इसलिए विनम्रता हम सभी के जीवन में होनी चाहिए, तभी जीवन की सफलता है।

इस अवसर पर भगवान आदिनाथ के भक्तामर स्त्रोत के चित्र का अनवारण अमरीश नीता जैन ने रिमोट का बटन दबाकर किया। धर्मसभा के उपरांत आचार्यश्री की आरती गई।

आचार्यश्री से आर्शीवाद लिया

चातुर्मास के प्रवक्ता सचिन आदर्श कलम ने बताया कि आचार्य श्री विनम्र सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में आयोजित भक्तामर स्त्रोत शिविर में पहुंचकर वार्ड 40 के पार्षद एवं नगर निगम लेखस समिति के अध्यक्ष धर्मेंद्र कुशवाह व राजेश जैन ने आचार्य श्री के चरणों में श्रीफल भेंट कर आर्शीवाद लिया। चातुर्मास वर्षायोग समिति के अध्यक्ष चक्रेश जैन, मंत्री योगेश जैन, स्वागध्यक्ष पदमचंद्र जैन, कार्यध्यक्ष पुरूषोत्तम जैन, उमेश जैन, धर्मेंद्र जैन, प्रशांत सिंघई ने अतिथिओं का तिलक लगाकर व शॉल पहनाकर सम्मान किया।