अब देशभर में लगभग 20% महंगी होगी बिजली!

स्रोत: न्यूज़ नेटवर्क      तारीख: 03-Jan-2018

नई दिल्ली, स्वससे। देश भर में बिजली 62 से 93 पैसे प्रति किलोवाट यानी 20% महंगी हो सकती है। ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने मंगलवार को लोकसभा में एक सवाल के जवाब में कहा कि कोयला आधारित पावर प्लांट्स  के उन्नयन के दौरान पहले साल से ही बिजली की दरें बढ़ाई जा सकती हैं। बता दें कि देश में करीब तीन चौथाई बिजली इन्हीं प्लांट्स से बनती है। फिलहाल, बिजली की औसत दर 5 रुपए प्रति किलोवाट के आसपास है।

 पिछले कुछ साल से राजधानी दिल्ली समेत बड़े शहरों में स्मॉग की समस्या पैदा हो गई है। स्मॉग बढ़ने से लोगों के स्वास्थ्य के लिए पैदा हुई चुनौती से निपटने के लिए सरकार और बिजली पैदा करने वाली कंपनियों पर कोयला बेस़्ड पावर प्लांट्स को अपग्रेड करने का दबाव है। ताकि इनसे प्रदूषण कम हो। एक अनुमान के तौर पर इसमें खर्च होने वाले फंड की भरपाई करने के लिए सरकार बिजली की दरों में औसत 20% तक की बढ़ोत्तरी कर सकती है। ऊर्जा मंत्री ने लिखित जवाब में कहा कि सेंट्रल इलेक्ट्रिकल अथॉरिटी ने ऐसी योजना बनाई है। अलग-अलग फेस में नए पर्यावरण नियम  लागू करने से पावर प्लांट्स की उत्पादकता नहीं गिरेगी। लंग्स (फेफड़ों) को नुकसान पहुंचाने वाले पार्टिकल्स, सल्फर और नाइट्रस आॅक्साइड्स के इमिशन में बाकी इंडस्ट्रीज के मुकाबले थर्मल पावर कंपनियों की हिस्सेदारी करीब 80% है।

तीन चौथाई बिजली कोयला प्लांट्स से

देश में करीब तीन-चौथाई बिजली कोयला बेस्ड पावर प्लांट्स से बनती है। बिजली की औसत दर करीब 5 रुपए प्रति किलोवाट है। देश में बिजली की दरों का मुद्दा राजनीतिक तौर पर बेहद संवेदनशील रहा है। एक एजेंसी की नवंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, मोदी सरकार बिजली कंपनियों के इमिशन (उत्सर्जन) में कमी लाने वाले उपकरण लगाने की लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डालने पर विचार कर रही है।

2022 तक इमिशन कम करने का लक्ष्य

सेंट्रल इलेक्ट्रिकल अथॉरिटी (उएअ) के अध्यक्ष रविंद्र कुमार वर्मा ने पिछले महीने एक रिपोर्ट में कहा था कि अब उनका लक्ष्य 2022 तक देश के सभी कोयला बेस्ड पावर प्लांट्स में इमिशन कटिंग नॉर्म्स लागू करना है। इसके लिए केंद्र सरकार बिजली कंपनियों को लोन देने पर विचार कर रही है।

2022 तक इमिशन कम करने का लक्ष्य

सेंट्रल इलेक्ट्रिकल अथॉरिटी (उएअ) के अध्यक्ष रविंद्र कुमार वर्मा ने पिछले महीने एक रिपोर्ट में कहा था कि अब उनका लक्ष्य 2022 तक देश के सभी कोयला बेस्ड पावर प्लांट्स में इमिशन कटिंग नॉर्म्स लागू करना है। इसके लिए केंद्र सरकार बिजली कंपनियों को लोन देने पर विचार कर रही है।