उप्र सरकार के बरसाने की होली को उत्सव के रूप में मनाने के निर्णय से ब्रजवासी गद्गद्

स्रोत: न्यूज़ नेटवर्क      तारीख: 05-Jan-2018

- प्राचीन परंपराओं के संरक्षण को बढ़ावा देने में ईश्वर भक्त राजाओं का बड़ा योगदान
- इतिहास में है उल्लेख, मुख्यमंत्री का होली पर आगमन इसी संयोग की एक कड़ी

मथुरा। ब्रज की परंपराओं के संरक्षण, भगवान श्रीकृष्ण की लीला और क्रीड़ा स्थलियों के विकास के लिए ब्रज तीर्थ विकास परिषद की पहल ब्रजवासियों की भावनाओं के अनुकूल है। बरसाने की होली की पांच हजार साल पुरानी परंपरा को देखने के लिए सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बरसाना आगमन एक सुखद संयोग है। इतिहास में उल्लेख है हजारों साल पुरानी भारतीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्द्धन के लिए ईश्वर भक्त राजा आगे आते रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ब्रज की परंपराओं से लगाव, ब्रज के विकास के लिए जो कसक है वो इतिहास की ही पुनरावृत्ति है। ब्रज के प्रमुख बरसाने के मानमंदिर सेवा संस्थान के अध्यक्ष राधाकांत शास्त्री ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में ब्रज, ब्रज के लोगों की भावनाओं से अवगत कराते हुए उन नकारात्मक विचार वाले तथाकथित सेवाभावियों को आईना दिखाया है जो अपने स्वार्थाे के चलते योगी आदित्यनाथ के बरसाना होली में शामिल होने को ब्रज की परंपराओं से छेड़छाड़ की संज्ञा दे रहे है। पत्र में इतिहास का सजीव उदाहरण देेते हुए बताया है कि बरसाना में पहले श्रीराधा जन्मोत्सव नहीं मनाया जाता था तब स्वयं श्रीराधारानी ने 600 वर्ष पहले राधावल्लभीय संत श्रीनेही नागरीदास जी को स्वप्न में भव्य उत्सव मनाने की आज्ञा दी थी। उन्होंने ओरक्षा नरेश की रानी भानमती के माध्यम से भव्य उत्सव मनाना प्रारंभ किया। प्रदेश की सरकार ने बरसाने की होली को उत्सव के रूप में मनाने का जो निर्णय लिया है उसके बाद ब्रज के संत, ब्रजवासी इस पल को निहारने के लिए व्याकुल है।

आखिर बेचैनी की वजह क्या है....

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ब्रज की पांच हजार साल पुरानी परंपराओं को जीवंत करने, भगवान श्रीकृष्ण की लीला, क्रीड़ा स्थलियों का उनके पौराणिक महत्व के साथ विकास करने का बीड़ा उठाया है। ताकि आने वाली पीढ़ी भी अपने आराध्य भगवान श्रीकृष्ण की लीला स्थली को निहार सकें, गौरवशाली संस्कृति को करीब से समझ सकें। अपने इस सपने को पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक ईमानदार और संत प्रवृत्ति के रिटायर्ड आईपीएस अफसर शैलजाकांत मिश्रा को चुना और ब्रज तीर्थ विकास परिषद का गठन कर उन्हें उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंप दी। सरकार की मंशा साफ है उसके द्वारा दी जाने वाली धनराशि का बंदरवाट न होकर सदुपयोग हो। बस ये ही बात सेवाभावी चोला ओढ़कर अपनी तिजोरियां भरने वालों को खटक रही है। वो ब्रज के ही कुछ स्वार्थी प्रवृत्ति के गाय की खाल ओढ़े भेड़ियों की आड़ लेकर समय पर बेवजह अड़ंगा डालने का प्रयास करते रहे हंै।
 

ब्रज की संस्कृति को बचाने में मानमंदिर का बड़ा योगदान

ब्रज के विरक्त संत रमेश बाबा के मानमंदिर सेवा संस्थान ने ब्रज की संस्कृति को बचाने के लिए बड़ा योगदान दिया है। बरसाना की पहाड़ियों के खनन को लेकर किया गया उनका आंदोलन आज भी ब्रजवासियों के जेहन में आस्था को सजीव कर देता है। इस आंदोलन में संतों और जन सहभागिता ने खनन माफियाओं को पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया था। इतना ही नहीं यमुना को प्रदूषण से बचाने के लिए रमेश बाबा के सानिध्य में ब्रज ही नहीं पूरे देश के संत एकजुट हो गए थे। ब्रजवासियों ने मानमंदिर के इस आंदोलन में न केवल बढ़चढ़ कर भाग लिया वरन दिल्ली तक आंदोलन भी किया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बरसाना की होली में शामिल होने के निर्णय पर मानमंदिर सेवा संस्थान की अभिव्यक्ति न केवल समूचे ब्रज के संत समाज की बल्कि ब्रज के लोगों की भावनाओं की अभिव्यक्ति है।