इस साल विश्व पर्यावरण दिवस की मेजबानी करेगा भारत

स्रोत: न्यूज़ नेटवर्क      तारीख: 20-Feb-2018

नई दिल्ली। भारत इस वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस की मेजबानी करने जा रहा है जिसकी दिल्ली में संयुक्त राष्ट्र और केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय की ओर से आयोजित एक संयुक्त कार्यक्रम में घोषणा की गई। इस बार की थीम ‘बीट प्लास्टिक प्रदूषण’ (प्लास्टिक से होने वाले प्रदूषण को हराना) है।
इस बार की थीम का मकसद सरकारों, उद्योग जगत, समुदायों और व्यक्तियों को प्रेरित कर प्लास्टिक का स्थायी विकल्प तलाश करना और इसके उत्पादन और उपयोग में शीघ्र कटौती लाना है। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि एक बार उपयोग होने वाले प्लास्टिक से लगातार हमारे महासागर प्रदूषित हो रहे हैं। यह न केवल समुद्री जीवन को नुकसान पहुंचा रहा है बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी बड़ा खतरा है।

पर्यावरण दिवस संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में होने वाला एक वैश्विक कार्यक्रम है जिसमें दुनियाभर में हजारों समुदाय भाग लेते हैं। इसकी शुरुआत 1972 में की गई थी। दिल्ली में इंदिरा पर्यावरण भवन में सोमवार को आयोजित एक कार्यक्रम में पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. हर्षवर्धन और संयुक्त राष्ट्र में पर्यावरण कार्यक्रम के प्रमुख एरिक सोल्हीम की उपस्थिति में विश्व पर्यावरण दिवस के आयोजन संबंधी आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए।
इस अवसर पर डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि वह पर्यावरण दिवस के आयोजन को लेकर काफी उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि भारत का दर्शन और जीवन शैली दोनों प्रकृति के साथ सह अस्तित्व की बात करते हैं। भारत पर्यावरण संरक्षण के प्रति पहले से ही प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को रोज कुछ ऐसा करना चाहिए जिससे पर्यावरण को लाभ मिले।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण दिवस समारोह के क्रम में कई आकर्षक गतिविधियों और कार्यक्रमों की एक श्रृंखला का आयोजन किया जाएगा। सार्वजनिक क्षेत्रों, राष्ट्रीय अभ्यारण्य, वनों के साथ-साथ समुद्री तटों पर साफ-सफाई की गतिविधियां संचालित की जाएंगी। संयुक्त राष्ट्र में पर्यावरण कार्य के प्रमुख एरिक सोल्हीम ने कहा कि भारत पर्यावरण के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभा रहा है और अपनी अर्थव्यवस्था में लगातार कार्बन उत्सर्जन में कमी ला रहा है। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक की समस्या अधिक से अधिक गंभीर हो रही है। ऐसे में विश्व को प्लास्टिक कचरे से मुक्ति दिलाने में भारत एक नेतृत्वकर्ता की भूमिका निभा सकता है।

उल्लेखनीय है कि दुनिया में हर साल 500 अरब प्लास्टिक बैग का इस्तेमाल किया जाता है। हर साल महासागरों में 80 लाख टन प्लास्टिक कचरा जाता है, यानि हर एक मिनट में एक ट्रक प्लास्टिक कचरा। पिछली एक सदी में जितना प्लास्टिक इस्तेमाल नहीं किया गया उतना प्लास्टिक एक दशक में इस्तेमाल किया गया है। सबसे ज्यादा चिंता एकल उपयोग या डिस्पोजेबल प्लास्टिक को लेकर है। हर सेकेंड में 10 लाख प्लास्टिक की बोतलें खरीदी जाती हैं। दुनिया के कुल कचरे का 10 प्रतिशत प्लास्टिक है।