खानपान बिगाड़ रहा युवाओं में कोलेस्ट्राल का स्तर, बढ़ रहे हृदय रोगी

स्रोत: न्यूज़ नेटवर्क      तारीख: 24-Feb-2018

भोपाल । प्रदेश की आने वाली पीढ़ी कितनी स्वस्थ होगी, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तो युवा भी हृदय रोगों से न केवल पीड़ित हो रहे हैं, बल्कि दिल की बीमारी के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। चिकित्सकों की मानें तो युवा वर्ग में कोलेस्ट्राल का स्तर बढ़ता जा रहा है। युवा वर्ग द्वारा जंक फूड के प्रति लगाव इसका मुख्य कारण है। चिकित्सकों के अनुसार 20 वर्ष बाद हृदय रोगियों की संख्या में वृद्धि होती है, तो केवल जंक फूड ही जिम्मेदार माना जाएगा। अभी तो युवा कोलेस्ट्राल को झेल लेंगे, लेकिन 40 वर्ष की आयु तक पहुंचते-पहुंचते वे पूरी तरह से हृदय रोग की जकड़न में होंगे।

राजधानी भोपाल समेत प्रदेश के बड़े से लेकर छोटे शहर या कस्बे की जंक फूड की दुकानों पर सुबह-शाम के वक्त भीड़ दिखाई देती है। कचौड़ी-समोसा-आलू बड़ा हो या पाव भाजी, छोले टिकिया, पानी पूरी...स्वाद के तड़के में युवा वर्ग इतना मशगूल हो गया है कि उसे अपनी सेहत की चिंता नहीं दिखाई दे रही। हालांकि यह जरूर देखा जाता है कि युवा वर्ग की दिनचर्या सुधरती जा रही है। युवक जहां शरीर के मसल्स उभारने के प्रति जागरूक हैं वहीं युवतियां स्लिम दिखने के प्रति, लेकिन बात जब स्वाद की आती है तो सारी बातें टाल दी जाती हैं। प्रदेश के शहरों में यदि सर्वे किया जाए तो खानपान की दुकानों पर सबसे अधिक ग्राहक के रूप में युवक-युवतियों के झुण्ड दिखाई देंगे। 
चिकित्सकों के अनुसार आंतों में संक्रमण, गले में खराश, लीवर में सूजन से लेकर बेड कोलेस्ट्राल का बढ़ा स्तर जांचों में सामने आ रहा है। इसका कारण जंक फूड है, जिसके प्रति इनके माता-पिता भी सतर्क नहीं दिखते। सीएमएचओ डॉ. वीके गुप्ता एवं वरिष्ठ एमडी डॉ.एचपी सोनानिया का कहना है कि यदि प्रदेश के शहरों में सर्वे किया जाए तो युवाओं में सबसे अधिक बेड कोलेस्ट्राल का स्तर पाया जा रहा है, जो कि आगामी वर्षों में हृदय रोगियों की संख्या में बढ़ोतरी का संकेत है। उनके अनुसार युवा वर्ग यही समझ नहीं पा रहा है कि कपड़े पहनना फैशन है या रोजाना जंक फूड खाना...? 

चिकित्सकों के अनुसार शरीर में रक्त प्रवाह को निरन्तर जारी रखने का काम हृदय द्वारा किया जाता है। हृदय को काम करने के लिये ऑक्सीजन एवं ग्लूकोज की जरूरत होती है। हृदय की मांसपेशियों को खून पहुंचना बन्द हो जाये तो ऐसी स्थिति को हृ्दयघात कहते हैं। हृदयघात में मरीज की छाती में तीव्र दर्द होता है एवं बैचेनी व घबराहट महसूस होती है और पसीना आता है। हृदय के बड़े भाग में खून पहुंचना बन्द होने पर वहां की मांसपेशियां निष्क्रिय हो जाती हैं। इससे हृदय खून को पम्प नहीं कर पाता है और मरीज का रक्तचाप गिरने लगता है, मरीज की मृत्यु भी हो सकती है। चिकित्सकों के अनुसार बेड कोलेस्ट्रॉल के बढ़ने से हृदय नलिकाओं की अन्दरूनी सतह पर वसा के थक्के जम जाते हैं एवं मधुमेह से इन्हीं थक्कों के ऊपर खून भी जमने लगता है। यही सब क्रियाएं धीरे-धीरे रक्त नलिकाओं को सिकोड़ देती हैं। किसी भी जगह पर एकाएक खून के जम जाने से रक्त नलिकाएं पूरी तरह चोक हो जाती हैं और मरीज को ह्दय घात आ जाता है। 

इस प्रकार बचा जा सकता है : डॉ. वीके गुप्ता के मुताबिक हृदयघात की संभावना वाली स्थिति से स्वयं को दूर रखने के लिये वजन पर नियंत्रण करें, नियमित व्यायाम करें, मानसिक तनाव से दूर रहें, स्वस्थ खानपान रखें एवं तैलीय पदार्थों का सेवन कम करें।