मानवीय गुणों को स्थापित करती है होली

स्रोत: न्यूज़ नेटवर्क      तारीख: 01-Mar-2018

बाल मुकुन्द ओझा

होली के दिन सब मिल जाते हैं। रंगों में रंग मिल जाते हैं। गिले-शिकवे सब छोड़के दुश्मन भी गले मिल जाते हैं। होली का खुमार ही कुछ ऐसा होता है। जहां ज्यादातर लोग होली को इसी अंदाज में मनाते हैं। भारत में पर्वों का अनादि काल से विशिष्ट महत्व है। होली एक ऐसा त्यौहार जिसके आते ही मन आल्हादित हो जाता है सारा आलम मस्ती में डूब जाता है। लगता है मानो चारोंओर मस्ती ही मस्ती है। हर तरफ मानो बहार छाई हुई है। हमारी संस्कृति की यह अनूठी विशेषता है कि हमारे त्यौहार समाज में मानवीय गुणों को स्थापित कर लोगों में समता समानता सद्भाव प्रेम और भाईचारे का सन्देश प्रवाहित करते है। होली देश का सबसे पुराना त्यौहार है जिसे छोटे -बड़े अमीर- गरीब सभी लोग मिलजुल कर मनाते है। यह असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है। राग-रंग का यह पर्व वसंत का संदेशवाहक भी है। राग रंग और नृत्य इसके प्रमुख अंग हैं। फाल्गुन माह में मनाए जाने के कारण इसे फाल्गुनी भी कहते हैं। इस दिन से फाग और धमार का गाना प्रारंभ हो जाता है। खेतों में सरसों खिल उठती है। बाग-बगीचों में फूलों की आकर्षक छटा छा जाती है। पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और मनुष्य सब उल्लास से आल्हादित हो जाते हैं। खेतों में गेहूँ की बालियाँ इठलाने लगती हैं। किसानों का ह्रदय खुशी से नाच उठता है। बच्चे-बुजुर्ग सभी सब कुछ संकोच और रूढ़ियाँ भूलकर ढोलक-झाँझ-मंजीरों की धुन के साथ नृत्य-संगीत व रंगों में डूब जाते हैं। उत्साह और उमंग से भरा ये त्यौहार एक दूसरे के प्रति प्रेम, भ्रातृत्व स्नेह और निकटता लाता है। इसमें लोग आपस में मिलते है, गले लगते है और एक दूसरे को रंग और अबीर लगाते है। इस दौरान सभी मिलकर ढ़ोलक, हारमोनियम तथा करताल की धुन पर धार्मिक और फागुन गीत गाते है।

होली राग रंग और मौज मस्ती का बांका त्यौहार है। होली हमारे लिये सांस्कृतिक और पारंपरिक उत्सव हैै। होली का त्योहार जैसे-जैसे नजदीक आता है वैसे-वैसे लोगों में खिलन्दड़ भाव के साथ एक अनोखा और अद्भुत उन्माद छा जाता है। विशेषकर उत्तर भारत के मैदानी राज्यों में होली बहुत धूमधाम के साथ मनाई जाती है। होली रंग बिरंगा पर्व है। रंग और पिचकारी लेकर युवा निकल पड़ते हैं और एक-दूसरे पर अबीर, गुलाल और रंग डालकर होली मनाते हैं। हर तरफ लोग मस्ती में झूमते व एक दूसरे पर अबीर-गुलाल लगाते व रंगों की वर्षा करते दिखाई देते हैं । यह त्यौहार सामाजिक समानता, राष्ट्रीय एकता और अखण्डता तथा विभिन्नता में एकता का साक्षात प्रतीक है। इस पर्व के अवसर पर लोग आपसी वैमनस्य को भुलाकर मित्र बन जाते हैं । यह त्योहार अमीर और गरीब के भेद को कम कर वातावरण में प्रेम की ज्योति प्रज्वलित करता है । नि:संदेह होली का पर्व हमारी सांस्कृतिक धरोहर है ।
देश में होली पर्व को अनेक कहानियों के साथ भी जोड़कर देखा जाता है।

उत्तर भारत के राज्यों में जिसमें राजस्थान भी शामिल है, भक्त प्रहलाद की कहानी विख्यात है। प्रहलाद भक्त की इस प्राचीन कहानी में बताया गया है कि हिरण्यकश्यप नाम का एक क्रूर और शक्तिशाली शासक था। वह स्वयं को न केवल भगवान मानता था अपितु दूसरों को भी प्रेरित करता था कि उसे भगवान के रूप में माना जाकर उसकी पूजा-अर्चना की जाये। उसने अपने राज्य में भगवान का नाम लेने पर प्रतिबन्ध लगा दिया था ओर भगवान के भक्तों पर तरह-तरह के अत्याचार करता था। हिरण्यकश्यप का पुत्र था प्रहलाद। प्रहलाद प्रभु की भक्ति में लीन रहता था जो उसके पिता को कभी सहन नहीं होता था। पिता की लाख कोशिशों के बावजूद प्रहलाद प्रभु भक्ति से विचलित नहीं हुआ। इस पर हिरण्यकश्यप ने उसे दण्डित करने का फैसला किया। हिरण्यकश्यप की बहिन होलिका को यह वरदान मिला था कि वह कभी आग में भस्म नहीं होगी। इसी का लाभ उठाते हुए हिरण्यकश्यप ने होलिका को आदेश दिया कि वह प्रहलाद को गोदी में बैठाकर जलती आग पर बैठ जाये ताकि होलिका बच जाये ओर प्रहलाद जलकर भस्म हो जाये। मगर हुआ इसका उल्टा। होलिका भस्म हो गई और प्रहलाद बच गया। होलिका दहन को प्रतीक के रूप में आज भी समूचे देश में मनाया जाता है। होली का पर्व नजदीक आते ही एक सार्वजनिक स्थान पर होली का झण्डा गाड़ा जाता है। इसके पास ही होलिका की अग्नि इकट्ठी हो जाती है। होली का पहला दिन होलिका दहन और दूसरा दिन धुलण्डी के रूप में मनाया जाता है। धुलण्डी के दिन एक-दूसरे पर रंग गुलाल डालकर पूरी मस्ती से गाते-बजाते होली मनाते हैं और बाद में एक-दूसरे के गले मिलकर होली की बधाई देते-लेते हैं। इस दिन शत्रु भी अपना वैर भाव भुलाकर एक-दूसरे को गले लगाते हैं।

होली के इस पावन पवित्र पर्व पर हमें यह संकल्प लेना चाहिये कि हम बुराई का परित्याग कर अच्छाई को ग्रहण करेंगे। ऐसा कोई भी कार्य नहीं करेंगे जो दूसरे को बुरा लगे। हम एक-दूसरे के सुख-दु:ख में भागीदारी देंगे और प्रेम और मोहब्बत के संदेश को घर-घर पहुंचाकर देश और समाज में सहिष्णुता, एकता और भाईचारे की भावना को विकसित करेंगे। इसी में हमारा, समाज का और देश का व्यापक हित निहित है।

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)