आवारा मवेशी रोक रहे ट्रेनों की रफ्तार, पटरियों के पास बनेगी दीवार

स्रोत: न्यूज़ नेटवर्क      तारीख: 16-May-2018

ग्वालियर| तेज रफ्तार से दौड़ रही एक्सप्रेस ट्रेनों के सामने अचानक मवेशी आ रहे हैं। इससे लगातार ट्रेनों का संचालन प्रभावित हो रहा है। इतना ही नहीं, किसी दिन यही मवेशी बड़े हादसे का सबब भी बनेंगे। कई बार तो टक्कर के बाद मवेशी के शव के टुकड़े इंजन या बोगी के पहियों में फंस जाते हंै। इससे ट्रेनों का संचालन तक ठप हो जाता है। लगातार इस तरह की घटनाएं हो रही हैं। इसके लिए कार्रवाई का प्रावधान है। मवेशी मालिकों पर 2 हजार रुपए तक का जुर्माना या दो साल तक की सजा हो सकती है, लेकिन  पर आरपीएफ  कार्रवाई को लेकर उदासीन है। उत्तर मध्य रेलवे की ओर से रोजाना सैकड़ों गाडिय़ां आती-जाती हैं। ट्रेनों के समय से परिचालन के लिए रफ्तार 110 तक पहुंच जाती है। इसी बीच, ट्रैक पर मवेशी आने से परेशानी खड़ी होती है।

सुबह के समय घूमते हैं पटरियों पर आवारा पशु
बानमोर व मुरैना रेलवे स्टेशनों के आस-पास ग्रामीण क्षेत्र के लोग अपने पशुओं को सुबह के समय छोड़ देते हंै। यह पशु रेल पटरियों के किनारे लगी घास को खाने के पटरियों तक आ पहुंचते हैं, जिसके चलते पशु कई बार ट्रेन की चपेट में आ जाते हैं, जिसके रेल परिचालन बाधित हो जाते हैं।
पटरी किनारे तबेले बन रहे कारण
पटरी से लगकर कई ऐसे इलाके हैं, जहां तबेलों की संख्या बहुत ज्यादा हैं। जहां मवेशियों को चरने के लिए खुला छोड़ा जाता है। यह मवेशी कई बार झुंड बनाकर पटरियों पर खड़े हो जाते हैं।
यहां पर होते हैं सबसे ज्यादा हादसे
रेलवे के अनुसार उत्तर मध्य रेलवे के अंतर्गत झांसी से दतिया, दतिया से डबरा, डबरा से संदलपुर के बीच इस तरह के हादसे होते हंै। इसके अलावा रायरू, बानमोर, बिरलानगर के बीच भी इस तरह की घटनाएं होती रहती हैं।