कांग्रेस को भारी पड़ा योगी आदित्यनाथ का प्रचार

स्रोत: न्यूज़ नेटवर्क      तारीख: 16-May-2018
-सिद्धारमैया के नेताओं को आयात करने के बयान का जनता ने दिया उत्तर
-स्टार प्रचारक के रूप में भाजपा के लिए शुभ साबित हुए योगी आदित्यनाथ 
-जिन सीटों पर प्रचार किया, सभी पर मिला जनसमर्थन   
 
 
 
आगरा/मधुकर चतुर्वेदी । आपको याद होगा कर्नाटक चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेसी मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा था कि भाजपा उत्तर भारत के नेताओं को कर्नाटक में प्रचार करने के लिए आयात कर रही है। संभवतः उनका निशाना उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर था लेकिन, जनता ने 15 मई की तारीख ने ना केवल कांग्रेस के राजनीतिक दुराग्रह को विफल करके ऐतिहासिक बनाया अपितु मुख्यमंत्री योगी के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में किए गए प्रचार को कांग्रेस व सिद्धारमैया के लिए काफी महंगा भी साबित कर दिया। 
 
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने चुनाव प्रचार के दौरान कर्नाटकवासी बनाम बाहरी का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कर्नाटक की अस्मिता का सवाल उठाते हुए कहा था कि भाजपा, उत्तर भारत के नेताओं खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व योगी आदित्यनाथ को आयात कर रही है। उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा था कि भाजपा के पास कोई नेता नहीं है। सिद्धारमैया के इस ट्वीट के बार उप्र की जनता ने चुप्पी साधते हुए धैय रखे रहा और राष्ट्र और समाज के विखंडित करने वाली इस मानसिकता का उत्तर नहीं दिया। आगरा से चुनाव प्रचार के लिए गए भाजपा के प्रदेश मंत्री पुरूषोत्तम खंडेलवाल ने करीब सप्ताहभर पहले स्वदेश को बताया था कि कर्नाटक का किसान कांग्रेस के बेहद नाराज है और जनता शासन में व्याप्त भष्ट्राचार से निजात पाने के लिए भाजपा को विकल्प के रूप में देख रही है। हुआ भी ऐसा, कर्नाटक के चुनाव में भाजपा को दक्षिण भारत में अप्रत्याशित तो मिली ही है, साथ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद उन्हीं के व्यक्तित्व के मेल खाता योगी आदित्यनाथ जैसा प्रतिभाशाली नेता भी मिला है।
 
योगी ने भाजपा के स्टार प्रचारक के रूप में कर्नाटक में 3 से 10 मई के बीच भाजपा के लिए कई रैलियां और रोड शो किए थे। सीएम योगी ने जिन 33 विधानसभा सीटों में प्रचार किया था, उन सभी सीटों पर बीजेपी को विजय मिली है। इससे पहले त्रिपुरा में भी योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट प्रभाव देखने को मिला था कि वहां भी जिस भी विधानसभा में योगी ने प्रचार किया था वहां भाजपा उम्मीदवार जीते थे। खुद कर्नाटक राज्य इकाई ने भी इन सीटों पर मिली विजय का श्रेय योगी आदित्यनाथ को दिया है। हमें यह भी स्मरण रखना चाहिए कि कर्नाटक में नाथ संप्रदाय के अनुयायियों की अच्छी खासी संख्या है। जबकि योगी खुद गोरक्षनाथ पीठ के महंत हैं। योगी ने कर्नाटक के प्रसिद्द मंजुनाथ पीठ का भी दौरा किया था जो नाथ संप्रदाय से ही जुड़ा है। यहां योगी की अपील का एकदम से प्रभाव देखने को मिला और नाथ सम्प्रदाय और मठों के समर्थकों ने सीधे तौर पर भाजपा का साथ दिया। 
 
हालांकि भाजपा बहुमत से दूर है, लेकिन निकट भी है। योगी आदित्यनाथ ने प्रचार के दौरान कर्नाटक में सर्वाधिक किसानों की आत्महत्या और प्रशासन में व्याप्त भष्ट्राचार का मुद्दा उठाया। साथ ही योगी आदित्यनाथ ने राजनीतिक विद्वेष के कारण केंद्र सरकार की योजनाओं को कर्नाटक सरकार द्वारा किनारे करने के मुद्दे को भी जनता के सामने मजबूती से रखा, जिसका लाभ भाजपा मिला। देश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों में भी योगी को स्टार प्रचारक के तौर पर बुलाया जाएगा और यदि उनकी कार्यशैली इसी तरह अपना प्रभाव छोड़ती रही तो आने वाले समय में वे मोदी के विकल्प के तौर पर भी उभर सकते हैं।