स्वदेश स्टोरी

महल का मोह

एक राजा था। उसने बहुत ही सुंदर और विशालकाय महल बनवाया। उसे उस महल से मोह हो गया। जो भी उसके पास आता, वह उससे महल की प्रशंसा अवश्य करता । राजा महल की अद्भुत नक्काशी और सुंदरता में ही खोया रहता। उसने राजकाज में रुचि लेना भी बंद कर दिया। लोग राजा को महल के ..

कामना का त्याग करके संतोषपूर्वक व्यतीत करें जीवन

तपस्वी जाजलि श्रद्धापूर्वक वानप्रस्थ धर्म का पालन करने के बाद खड़े होकर कठोर तपस्या करने लगे। उन्हें गतिहीन देखकर पक्षियों ने उन्हें कोई वृक्ष समझ लिया..

दो पैसे के काम के लिए तीस साल की बलि!

स्वामी विवेकानंद एक बार कहीं जा रहे थे। रास्ते में नदी पड़ी तो वे वहीं रुक गए क्योंकि नदी पार कराने वाली नाव कहीं गई हुई थी। स्वामीजी बैठकर राह देखने लगे कि उधर से नाव लौटे तो नदी पार की जाए। एका-एक वहां एक महात्मा भी आ पहुंचे। स्वामीजी ने अपना परिचय देत..

मन को आकाश के चंद्रमा की तरह बनाएं

एक व्यक्ति एक प्रसिद्ध संत के पास गया और बोला गुरुदेव मुझे जीवन के सत्य का पूर्ण ज्ञान है। मैंने शास्त्रों का काफी ध्यान से अध्ययन किया है। फिर भी मेरा मन किसी काम में नहीं लगता। जब भी कोई काम करने के लिए बैठता हूं तो मन भटकने लगता है और मैं उस काम को छ..

पाक ने पुंछ में फिर एक बार किया संघर्ष विराम का उल्लघंन

जम्मू। जम्मू के पुंछ में बुधवार सुबह पाक ने एक बार फिर गोलीबारी कर संघर्ष विराम का उल्लघंन किया है। पाक रैंजर्स ने बिना किसी उकसावे के पुंछ की सीमा रेखा पर स्थित बीएसएफ की चौकियों तथा रिहायशी इलाकों को निशाना बना बुधवार सुबह गोलीबारी की। भारतीय जवानों ने ..

ग्वालियर की बेटी नम्रता मुजुमदार - जोशी मि. इंडिया अर्थ प्रतियोगिता में बनेंगी प्रतिभागी

एक ऐसे व्यक्तित्व के कुछ नए पहलुओं से परिचित होना आवश्यक है जो वर्ष 1994 में “आउटस्टैंडिंग पर्सनालिटी ऑफ ग्वालियर” के खिताब से..

जनसेवा के लिए बनाया राजनीति को माध्यम

पूर्व नेता प्रतिपक्ष नगर निगम सुधीर गुप्ता से स्वदेश डिजिटल की बातचीत   ग्वालियर/स्वदेश डिजिटल/अरविन्द माथुर। अपने शहर और जनता के हितों के लिए काम करने के उद्धेश्य से राजनीति को मैने अपना माध्यम बनाया। इसके लिए मुझे प्रेरणा पूर्व केन्दीय मंत्री स्व. माधवराव सिंधिया से मिली,उन्हीं के सानिध्य में कांग्रेस पार्टी में शामिल होकर उनके मार्गदर्शन में काम करते हुए आगे बढ़ा और आज अपनी पहचान बना सका हूं। यह बात स्वदेश से विशेष बातचीत के दौरान वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष नगर निगम सुधीर ..

अदम्य साहस की धनी रति जैन

एक साधारण सी महिला जो शादी के बाद सारी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाती है। अचानक उसके सामने ऐसी विषम परिस्थितियां आ जाती हैं। वह ..

दहेज प्रथा को समाज से दूर करने के लिए स्वयं आगे आएं: अर्चना

आज समाज के निर्माण में कई महिलाएं बड़ी भूमिका निभा रही हैं। चाहे बात घर परिवार की जिम्मेदारियों की हो या समाज के प्रति सेवा भाव की। ये वे महिलाएं हैं जो स्वयं जागरूक होकर समाज की दूसरी महिलाओं को भी समाज के..

ज्ञान “अप्लाय” कीजिए “ सप्लाय” नहीं : अर्चना नवीन सविता

  अर्चना शर्मा, आज विश्व विख्यात संस्था आर्ट ऑफ़ लिविंग की एक प्रतिष्ठित शिक्षिका है I आप उनसे मिलेंगे तो प्रथम दृष्टया आपको लगेगा कि उनकी उम्र काफी कम है, पर जब आप उनसे बातचीत करेंगे, तो उनका अनुभव, बातचीत की गहराई यह दर्शाएगी कि वे अपनी वास्तविक उम..

''सुधीर राव दुरापे जिन्होंने बनाया रक्तदान महादान को जीवन का लक्ष्य''नवीन सविता

11 जुलाई 2006 को मुंबई की लोकल ट्रेनों में लगातार 11 मिनट के अंतराल मे 7 प्रेशर कुकर मे रखे हुए बमो में विस्फोट हुए थे। जिसमे लगभग 209 व्यक्तियों की मौत हुई,..

एक नई सोच.....नवीन सविता

माउंट लिट्रा जी स्कूल की डायरेक्टर श्रीमती अर्चना तोमर की नवीन सविता से विशेष बातचीत.......

भौतिकवाद में बहकती युवा पीढ़ी

आज का युवा अपने आपको आधुनिक कहलवाने की चाह में, भौतिकता की आग में कुछ इस तरह कूद पड़ा है, कि उसे यह तक आभास नही है कि वह जो कर रहा है। वह उसके भविष्य के लिए कितना उचित है। कभी जगत गुरू के नाम से मशहूर भारत के युवा अपने आपको अध्यात्म और दर्शन के लिए समर्प..

प्रेरक प्रसंग - महानता की परिभाषा

एक राजा बहुत दयालु और दूरदर्शी था। एक दिन वह किसी विषय को लेकर अपने आप में गहन सोच में डूबा हुआ था। तभी उसका एक मंत्री पास आया और बोला- महाराज आप आज सुबह से ही किस सोच में खोए हुए हैं? राजा ने कहा, राज्य में बेईमानी बढ़ती जा रही है। सभी ओर छल-कपट व धोखेबा..

कोई अन्याय नहीं किया

  भिक्षा ले कर लौटते हुए एक शिक्षार्थी ने मार्ग में मुर्गे और कबूतर की बातचीत सुनी। कबूतर मुर्गे से बोला- मेरा भी क्या भाग्य है? भोजन न मिले, तो मैं कंकर खा कर भी पेट भर लेता हूँ। कहीं भी सींक, घास आदि से घोंसला बना कर रह लेता हूँ। माया मोह भी नहीं,..

कमाई की रोटी

गुरु नानक अपने शिष्यों के साथ धर्म-उपदेश देते घूमते रहते थे। वे भूखे-प्यासे एक बस्ती में पहुँचे। शिष्यों ने सवाल किया कि यहाँ हमें भोजन कौन देगा ? तभी एक दीन-हीन बढ़ई वहाँ आकर बोला, ‘‘आप सब मेरे घर चलें।’’ उसके घर में खाने को कुछ न..

दो नावों की सवारी

  दमन नामक एक छात्र अपने गुरु से धनुर्विद्या सीख रहा था। उसके गुरु अत्यंत प्रसिद्ध थे। वे सभी छात्रों को बड़े मनोयोग से सिखाते थे। दमन सभी छात्रों से प्रतिस्पर्धा करता था और उनसे हर हाल में आगे निकलना चाहता था। वह अपने गुरु द्वारा सिखाई गई विद्या को..

हड़ताली कर्मचारी और रिक्शेवाला - एक लघुकथास्वदेश वेब

    *मनोज कुमार शर्मा '"एडवोकेट" रिक्शेवाला बड़ी देर से हड़ताली कर्मचारियों को देख रहा था जो टेंट लगाए वेतनमान बढ़ाए जाने की मांग सरकार से कर रहे थे आज हड़ताल का 10वां दिन था। सभी बात कर रहे थे कि आज शायद कर्मचारियों की मांगें मान ली जाएंगी। ..