भारतीय संस्कृति सबसे समृद्ध : दलाई लामा

Update: 2014-01-14 00:00 GMT

रायपुर | छत्तीसगढ़ प्रवास पर आए तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा ने सोमवार को यहां पंडित रविशंकर विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में भारतीय संस्कृति की जमकर सराहना की और कहा कि भारतीय संस्कृति सबसे समृद्ध संस्कृति है।
दलाई लामा ने कहा, "यहां नागार्जुन जैसे महान दार्शनिक और वैज्ञानिक ने तपस्या की। नागार्जुन के विचार संपूर्ण मानवता के कल्याण के लिए हैं। व्यक्ति चाहे किसी भी धर्म का अनुसरण करता हो, लेकिन उसका आचरण शुद्ध होना चाहिए। सभी धर्मो के बीच सद्भावना और मैत्री का भाव होना चाहिए। यह सब भारतीय संस्कृति में दृग्गोचर होता है।"
संगोष्ठी कि अध्यक्षता कर रहे मुख्यमंत्री रमन सिंह ने इस अवसर नागार्जुन के महत्व को रेखांकित किया और कहा कि नागार्जुन का शोध और दर्शन आज भी सिरपुर के शिलालेखों में दर्ज है।
नोबल शांति पुरस्कार से सम्मानित दलाई लामा ने संगोष्ठी का उद्घाटन किया। संगोष्ठी का आयोजन राज्य शासन के छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल और पंडित रविशंकर विश्वविद्यालय द्वारा सारनाथ विश्वविद्यालय के तिब्बत अध्ययन केंद्र के सहयोग से किया गया है।
रमन सिंह ने कहा, "नागार्जुन केवल दार्शनिक ही नहीं बल्कि एक महान रसायनज्ञ और औषधिशास्त्र के ज्ञाता भी थे। उन्होंने सबसे पहले पारद और सोने के भस्म को औषधि के रूप में इस्तेमाल किया। उन्होंने शून्य का अविष्कार कर भारत को दुनिया में गौरवान्वित किया। इतने बड़े महान वैज्ञानिक और दार्शनिक का छत्तीसगढ़ में लंबा समय व्यतीत करना हम सभी छत्तीसगढ़वासियों के लिए गौरव की बात है।"
रमन सिंह ने आगे कहा कि नोबल शांति पुरस्कार से सम्मानित दलाई लामा ने शांति की जो जोत जलाई है, उसका लाभ पूरी दुनिया को मिलेगा।
संगोष्ठी में सारनाथ विश्वविद्यालय के कुलपति गोगांग सेमटन और पंडित रविशंकर विश्वविद्यालय के कुलपति एस.के.पाण्डेय ने भी अपने विचार रखे।


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