सम्राट मिहिर भोज को लेकर फिर आमने -सामने आए दो समाज, प्रशासन हुआ सख्त, जानिए क्या है विवाद

Update: 2022-08-29 12:33 GMT

ग्वालियर। राजा मिहिरभोज की जाति को लेकर एक बार फिर गुर्जर समाज और क्षत्रिय समाज आमने-सामने आ गए है। गुर्जर समाज ने आज राजा भोज की जयंती पर कल मंगलवार को चल समारोह निकालने का सोशल मीडिया पर ऐलान किया है। इसके थोड़ी देर बाद क्षत्रिय समाज ने भी चल समारोह निकालने की घोषणा कर दी और प्रशासन से इसके लिए अनुमति मांग की है।  दोनों समाजों को एक बार फिर आमने-सामने आने पर प्रशासन जाग गया। पुलिस प्रशासन ने तत्काल दोनों समाज के वरिष्ठ जनों को बुलाकर हाईकोर्ट के आदेश की जानकारी दी।  

प्रशासन ने बताया की हाईकोर्ट में अभी ये मामला लंबित है। इस ममले में हायकोर्ट के पिछले आदेश के अनुसार कोई भी इनको लेकर न तो सोशल मीडिया पर पोस्ट करेगा और न हीं किसी भी तरह का कोई आयोजन किया जाएगा.अगर किसी भी समुदाय के द्वारा माननीय हाईकोर्ट के निर्देश का पालन नहीं किया तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बैठक में उपस्थित क्षत्रिय समाज के लोगों ने दूसरे समाज द्वारा हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना की बात कही तब  अपर कलेक्टर ने 'दोनों समाजों के लोगों को निर्देश दे दिए गए हैं. जो भी माननीय उच्च न्यायालय का आदेश का पालन नहीं करेगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 

प्रशासन ने इस संबंध में एक आदेश जारी कर कल मिहिरभोज जयंती पर इससे संबंधित पोस्ट, होर्डिंग, बैनर, समारोह आदि निकालने पर रोक लगा दी है। प्रशासन ने इस मामले में सख्त निर्देश देते हुए कहा की यदि किसी भी व्यक्ति द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट डाली जाती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।  

कौन थे सम्राट मिहिरभोज -

इतिहासविदों के अनुसार सम्राट मिहिर भोज गुर्जर प्रतिहार वंश के एक प्रतापी राजा थे। वे 836 ई में राजगद्दी पर बैठे थे। राज संभालने के बाद मिहिरभोज ने अपने साम्राज्य की सीमाओं का विस्तार किया और अपने कुल के पुराने वैभव को लौटा दिया।उन्होंने अपने शासन काल में 843 ई में गुर्जरत्रा-भूमि (मारवाड़) में भी अपनी प्रतिष्ठा कायम की जो उनके पिता के साम्राज्य के दौरान कमजोर हुई थी।  

विवाद का कारण 

सम्राट मिहिरभोज की जाति को लेकर गुरजार और क्षत्रिय समाज के बीच विवाद बना हुआ है। दोनों ही समाजों का तर्क है की सम्राट मिहिरभोज उनके पूर्वज है। दरअसल वर्ष 2021 में ग्वालियर में एक चौराहे और सम्राट की एक प्रतिमा लगाई जानी थी। इस प्रतिमा के नीचे लगे शिलालेख पर उनकी जाति को लेकर 'गुर्जर' शब्द लिखा गया था. यही विवाद की वजह बना और यहीं से सारा विवाद शुरू हुआ। गुर्जर समुदाय के लोगों का दावा है कि मिहिर भोज गुर्जर थे वहीँ राजपूत समाज का कहना है की महिर भोज राजपूत क्षत्रिय थे और गुर्जर नाम केवल गुर्जरा देश के एक क्षेत्र के नाम के चलते प्रयोग किया जाता है। यही मुद्दा दोनों समाजों के बीच कटुता और संघर्ष का कारण बने हुए है। 


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