राजस्थान के छोटे-से कस्बे की अनूठी कला है “थेवा”, IGNCA में फिल्म की हुई स्क्रीनिंग
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नईदिल्ली/वेब डेस्क। सोने की महीन चादरों को रंगीन कांच पर जोड़कर छोटे उपकरणों की मदद से सोने पर डिजाइन तैयार करने की कला है “थेवा”। यह आभूषण कला भारत में सदियों से प्रचलित है। इसकी उत्पत्ति राजस्थान के प्रतापगढ़ से हुई है। इस कला में अब प्रतापगढ़ के मात्र 12 परिवार लगे हुए हैं। इसी हुनर पर आधारित फिल्म “थेवा” का प्रदर्शन किया गया, जिसका निर्माण इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र और निर्देशन शिवानी पांडेय ने किया है। निर्देशिका शिवानी पांडेय द्वारा निर्देशित इस फिल्म में उन गुमनाम कलाकारों को दिखाया गया है, जो रहस्यमय तरीके से निर्मित इस कला को जीवित रखे हुए हैं। कला और संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के महत्त्वपूर्ण उद्देश्य से इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र ऐसी फिल्मों का निर्माण और प्रदर्शन निरंतर करता आ रहा है।
फिल्म डायरेक्टर शिवानी पांडेय
शुक्रवार को केंद्र के समवेत सभागार में सायं चार बजे से आईजीएनसीए के मीडिया सेंटर द्वारा “फिल्म क्लब” के अंतर्गत इस फिल्म की स्क्रीनिंग का आयोजन किया गया। फिल्म के प्रदर्शन के बाद निर्देशिका शिवानी पांडेय ने फिल्म के निर्माण की कहानी को दर्शकों के साथ साझा किया। इसके बाद दर्शकों ने फिल्म से जुड़े प्रश्न शिवानी से पूछे और इस अनूठी कला को फिल्म के माध्यम से सबके सामने लाने के लिए उन्हें धन्यवाद भी दिया। लेखिका एवं किस्सागो मालविका जोशी ने फिल्म की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस फिल्म में अनोखी कला थेवा के बारे में बहुत सुगढ़ता और विस्तार से बताया गया है। उन्होंने थेवा से जुड़े अपने संस्मरण भी साझा किए। उन्होंने कहा कि ऐसी फिल्में कला और संस्कृति के संरक्षण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। सेंसर बोर्ड के पूर्व सदस्य अतुल गंगवार ने कहा कि ऐसे चलचित्र ही हमारी संस्कृति और कला को जीवंत बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों की संस्कृति को भी चलचित्र के माध्यम से जनता के सामने लाने का प्रयास किया जाना चाहिए, जिससे हमारे देश के विभिन्न राज्यों की कला और संस्कृति की जानकारी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हो सके। फिल्म स्क्रीनिंग के दौरान किसान नेता नरेश सिरोही, आईजीएनसीए के मीडिया सेंटर के नियंत्रक अनुराग पुनेठा, उप नियंत्रक श्रुति नागपाल, फिल्म के सहायक निर्देशक अनिल पांडेय और उमेश पाठक आदि मौजूद रहे।