अब हाथ में माला पकड़ जप करें बाबूलाल
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भोपाल / विनोद दुबे। सरताज सिंह, दमोह वाला बाबा (रामकृष्ण कुसमारिया) और बाबूलाल गौर जैसे नेताओं को भगवान और पार्टी ने क्या कुछ नहीं दिया। विधायक, मंत्री और मु यमंत्री तक बनाया। इसके बाद भी पार्टी से बफादारी नहीं करना, यह उचित नहीं है। उन्हें (श्री गौर) विचार करना चाहिए कि पार्टी द्वारा उन्हें मु यमंत्री तक बनाया गया, वह अब और क्या बनना चाहते हैं। आयु के जिस उत्तरार्ध में वो हैं, उनके लिए एक ही सुझाव है कि अब वह माला हाथ में ले लें और भगवान का नाम जप करते रहें। गुरूवाणी, रामायण, महाभारत पढ़ते रहें। इसके अलावा उनके लायक कोई काम नहीं।
यह बात भाजपा के वयोवृद्ध नेता और पूर्व सांसद कैलाश नारायण सारंग ने गुरूवार को 'मध्य स्वदेश' से विशेष चर्चा में कही। श्री सारंग ने आगे कहा कि राजनीति में अब समय युवाओं का है। राजनीति में जवान लोग आ रहे हैं और वह अच्छा काम भी कर रहे हैं। उन्हें काम करने दें, हम बुजुर्ग हो गए हैं। हमारा काम सिर्फ इतना सा रह गया है कि युवा अगर मांगें तो ही उन्हें मार्गदर्शन देने जाएं। अगर मांगें नहीं तो मार्गदर्शन देने की भी जरूरत नहीं है। श्री गौर को आराम करना चाहिए। उनकी उम्र भजन करने की है, उन्हें घर में बैठकर भजन करना चाहिए। इस देश में शक्ति के साथ राष्ट्रवाद पनप रहा है, बढ़ रहा है। अनावश्यक राजनीति करके उस राष्ट्रवाद को धक्का नहीं लगाएं। श्री सारंग कहते हैं कि मोदी जी के राज में राष्ट्रवाद प्रखर रूप से बढ़ रहा है। अन्य राजनीतिक दल इसे इसलिए स्वीकार नहीं करते कि क्योंकि राष्ट्र को समर्पित सभी लोग इस समय शासन में हैं। राष्ट्र और राष्ट्रवाद के प्रति हमारी भावना बहुत अधिक सशक्त है।
जनसंघ या भाजपा की बुनियाद निस्वार्थ राष्ट्रप्रेम के भाव के साथ हुई, फिर आज टिकटों की भागमभाग, प्रतिस्पर्धा को किस रूप में देखते हैं। इस प्रश्न पर प्रतिक्रिया देते हुए श्री सारंग कहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी इस तरह के लोग बहुत ही सीमित और अपवाद स्वरूप हैं। भाजपा कार्यकर्ता आज भी समर्पित है। राष्ट्र और राष्ट्र की प्रगति के लिए काम करता है। मप्र में शिवराज सिंह चौहान का शासन स्वर्णिम मप्र और सबको साथ लेकर चलने के ध्येय के साथ चला। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार का नारा ही 'सबका साथ-सबका विकास' है। कांग्रेस पद, प्रतिष्ठा, पैसा, धन की लालची पार्टी है। राष्ट्र और समाज कल्याण के कांग्रेस के लिए कोई मायने नहीं हैं। सबका साथ-सबका विकास और अंत्योदय हमारा लक्ष्य पहले भी था, अब भी है और हमेशा बना रहेगा। कुछ लोग जरूर हमारे यहां भी गड़बड़ करने वाले हैं, उनको भगवान सबक दे देता है। क्योंकि भगवान भी चाहता है कि हिन्दुस्तान अब बड़ा, समृद्ध, स पन्न हिन्दुस्तान बने।
पूर्व केन्द्रीय मंत्री यशवंत सिंन्हा को पत्र लिखकर जताई गई स त नाराजगी और तीखी टिप्पणी के समान प्रदेश के विद्रोही नेताओं को भी समझाइस देंगे? इस सवाल पर प्रतिक्रिया देते हुए श्री सारंग कहते हैं कि पार्टी से बगावत पर जो सलाह यशवंत सिन्हा को दी थी, वही सुझाव इन सब नेताओं के लिए भी है। ऐसे बुजुर्ग नेता जिन्हें सब कुछ मिल गया है। वो ही अगर पार्टी से अनुशासनहीनता और विद्रोह करेंगे तो मैं समझता हँू यह बहुत अनुचित है।
मेरी कश्ती जहां डूबी, वहां पानी बहुत कम था...
मप्र में चौथी बार भाजपा की सरकार नहीं बन सकी? क्या कारण मानते हैं? : इस सवाल के उत्तर में पूर्व सांसद कैलाश नारायण सारंग कहते हैं कि गौर, सरताज और दमोह वाले बाबा जैसे लोगों ने विद्रोह किया तो समाज और संगठन में भ्रम उत्पन्न हो गया था, इस कारण भाजपा प्रदेश में सरकार बनाने से चूक गई। विधानसभा चुनावों में अपने ही दल के वरिष्ठ नेताओं की बगावत पर प्रतिक्रया श्री सारंग कुछ इस तरह भी व्यक्त करते हैं- 'मुझे गम था तो ये गम था, न कुछ गम था, मगर गम था, मेरी कश्ती जहां डूबी, वहां पानी बहुत कम था।' अर्थात जहां पानी बहुत कम था, हम वहीं डूबे। केन्द्र में इस बार क्या संभावना देखते हैं? सवाल पर श्री सारंग कहते हैं कि प्रचंड बहुमत की सरकार बनेगी। हम तो घर पर आराम करते हैं, भजन करते हैं। पार्टी बढ़े इसके लिए भगवान से प्रार्थना करते हैं। आपके मत से भोपाल से लोकसभा टिकट का कौन अधिक मजबूत दावेदार? सवाल पर श्री सारंग कहते हैं कि टिकट मांगने का अधिकार सभी कार्यकर्ताओं को है। दावा हर कोई पेश कर सकता है। लेकिन लेकिन टिकट वितरण हो जाने के बाद पार्टी जिसे टिकट दे, प्रत्येक कार्यकर्ता को यह सोचकर काम करना चाहिए कि उन्हें कमल को जिताना है।