Bihar Politics: तेजस्वी यादव के दरभंगा दौरे पर सियासत गर्म, मंदिर में पूजा और इफ्तार में शिरकत पर उठा विवाद

Bihar Politics: बिहार के नेता प्रतिपक्ष और राजद नेता तेजस्वी यादव के दरभंगा दौरे ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। उनके अहिल्या स्थान मंदिर में पूजा-अर्चना करने और फिर इफ्तार पार्टी में शामिल होने पर सत्ताधारी दल के नेताओं ने कड़ा ऐतराज जताया है।
तेजस्वी यादव ने अपने दौरे की शुरुआत दरभंगा के कमतौल स्थित अहिल्या गौतम मंदिर से की, जहां उन्होंने पूजा-अर्चना की और मंदिर परिसर का भ्रमण किया। इस दौरान राजद जिलाध्यक्ष उदयशंकर यादव, पूर्व विधायक ऋषि मिश्रा, पूर्व मंत्री ललित यादव, अब्दुलबारी सिद्दीकी सहित अन्य राजद नेता उनके साथ मौजूद थे। मंदिर में पूजा के बाद उन्होंने गौतम कुंड का भी निरीक्षण किया। इसके बाद तेजस्वी यादव दरभंगा के जाले स्थित अल्हदा एकेडमी में आयोजित इफ्तार पार्टी में पहुंचे, जहां उन्होंने मुस्लिम समुदाय के लोगों के साथ रोजा इफ्तार किया।
इसी को लेकर बिहार के भूमि एवं राजस्व मंत्री संजय सरावगी ने तेजस्वी यादव पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि तेजस्वी ने मंदिर में माथे पर लगाए गए तिलक को मिटाकर इफ्तार पार्टी में शिरकत की। उन्होंने इसे "वोट बैंक की राजनीति" करार देते हुए कहा कि तेजस्वी की मानसिकता तिलक को लेकर नकारात्मक है और यह सनातन धर्म के प्रति असहिष्णुता दर्शाता है।
वहीं, नगर विकास मंत्री जीवेश मिश्रा ने भी तेजस्वी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें अपने धर्म और दूसरे धर्मों का समान रूप से सम्मान करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि तेजस्वी यादव केवल राजनीतिक फायदे के लिए यह सब कर रहे हैं और तुष्टिकरण की राजनीति में लगे हुए हैं।
इन आरोपों पर तेजस्वी यादव ने सफाई देते हुए कहा कि वे सिर्फ पूजा-अर्चना के लिए मंदिर गए थे और बाद में "गंगा-जमुनी तहजीब" के तहत इफ्तार में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि रमजान के इस पाक महीने में सभी समुदायों को आपसी सौहार्द बनाए रखना चाहिए। उन्होंने इफ्तार को आपसी भाईचारे को मजबूत करने का प्रतीक बताया और किसी भी राजनीतिक बयानबाजी से बचने की कोशिश की।
तेजस्वी यादव के इस दौरे को लेकर राज्य की राजनीति में चर्चाओं का दौर जारी है। सत्ताधारी दल इसे तुष्टिकरण की राजनीति बता रहा है, जबकि राजद इसे सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल कह रहा है।