भारत की बढ़ती ताकत के आगे ‘आदाब’ भूल कर ‘नमस्ते’ करने लगा पाकिस्तान...
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मधुकर चतुर्वेदी
नई दिल्ली/वेब डेस्क। वैश्विक जनसंख्या का लगभग 42 प्रतिशत और वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का 25 प्रतिशत हिस्सा रखने वाले क्षेत्रीय संगठन ‘शंघाई सहयोग संगठन’ (एससीओ) की भारत में दो दिवसीय बैठक शुक्रवार को समाप्त हो गयी। एक ओर पूरी दुनिया जहां रूस-यूक्रेन युद्ध में उलझी है, तो दूसरी ओर भारत एससीओ की बैठक की अध्यक्षता कर अपने सक्षम नेतृत्व की ताकत विश्व को दिखा रहा है। जब दुनिया पूर्व से पश्चिम की ओर बंटी हुई है तो चीन से इतर विश्व में शांति स्थापना के लिए दुनिया भारत की ओर आशा भरी नजरों से देख रही है। बैठक इसलिए भी दिलचस्प रही है कि इस बैठक में जहां एक ओर रूस और चीन के साथ सम्बंधों को नए आयाम देने का भारत ने प्रयास किया तो दूसरी ओर 12 वर्षो बाद बैठक में शामिल होने आए पाकिस्तान के विदेशमंत्री को आंतकवाद को लेकर भारत ने एक बार फिर से दो-टूक शब्दों में कड़ा संदेश भी दिया। वो भी ऐसे समय में जब, आर्थिक मोर्चे पर पाकिस्तान बुरी तरह पस्त हो चुका है। इनता ही नहीं ‘रेड कारपेट’ की उम्मींद कर रहे पाकिस्तान के विदेश मंत्री को भारत ने ‘आदाब’ की जगह ‘नमस्ते’ भी करा दिया।
आम तौर पर भारत में जब भी पाकिस्तान के नेता दौरे पर आए हैं, उन्होंने हाथ तो दुआ की मुद्रा में उठाए लेकिन, अपने देश लौटने के बाद आंतकवाद को शरण देकर भारत में अशांति फैलाने का ही काम किया है। एससीओ की बैठक में भारत ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री से पहले तो नमस्ते करवा दिया और फिर बैठक के दौरान आतंकवाद पर भी बिना नाम लिया जमकर सुनाया भी। दरअसल गोवा में एससीओ की बैठक से पहले इसके सदस्य देशों की अगवानी में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर सभी नेताओं के हाथ जोड़ रहे थे। चीनी विदेश मंत्री किन गांग चीनी मुद्रा में नमस्ते किया वहीं रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी नमस्ते किया। मीटिंग से पहले जब जयशंकर विदेश मंत्रियों का इंतजार कर रहे थे तो दूर से आते पाक विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो को देखते ही उन्होंने दूर से ही हाथ जोड़ा। ऐसा लग रहा था कि बिलावल हाथ मिलाने की मुद्रा में आगे बढ़ रहे थे लेकिन जयशंकर के हाथ जोड़ते ही पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने भी हाथ जोड़ लिए। जब बिलावल ने हाथ जोड़ा तो जयशंकर दूसरी तरफ देखने लगे। यह पहला मौका जब आदाब की जगह पर पाकिस्तान के किसी नेता ने भारत में नमस्ते किया हो। इससे पहले नवाज शरीफ और परवेज मुशर्रफ के भारत दौरे पर उन्हें या तो हाथ मिलाते या फिर आदाब वाले अंदाज में हाथ उठाते देखा गया था। पर गोवा में एससीओ की बैठक में विदेश मंत्री जयशंकर ने बिलावल से नमस्ते करवा दिया।
वैसे भी भारत ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वह पाकिस्तानी विदेश मंत्री के साथ कोई द्विपक्षीय बातचीत नहीं करने वाला है। वहीं विदेश मंत्री जयशंकर ने अपने संबोधन में यह कहकर कि आज भी आतंकवाद की समस्या बनी हुई है। किसी भी तरह के आतंकवाद को सही नहीं ठहराया जा सकता है और इसे रोकने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए, पाकिस्तान को कड़ा संदेश भी दे दिया।