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बदलता मध्यप्रदेश: मसाला इकाई से सफल उद्यमी बने ध्यानदास, 50 हजार रुपये प्रतिमाह की हो रही आय…

भोपाल। युवाओं के लिए स्व–रोज़गार आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण का साधन है। स्व–रोज़गार के जरिए युवा नवाचार और उद्यमिता को भी बढ़ावा दे रहे हैं। अपने कौशल और रुचियों के अनुसार व्यवसाय शुरू कर रोज़गार के नए अवसर उत्पन्न कर रहे हैं।
इन्हीं युवाओं में से एक हैं विदिशा जिले के सिरोंज रोहिलपुरा चौराहा आरोन रोड के रहने वाले ध्यानदास पंथी। उन्होंने अनुसूचित जाति विकास एवं जनजातीय कार्य विभाग की संत रविदास स्व–रोज़गार योजना का लाभ लेकर मसाला उद्योग इकाई शुरू की।
इसके लिए उन्होंने 4 लाख रुपये का ऋण लिया, इससे उनके काम ने रफ़्तार पकड़ी और अब उन्हें 50 हजार रुपये की मासिक आय हो रही है। उन्होंने बताया कि सिंरोंज के साथ ही पास के जिले गुना एवं राजगढ़ तक मसालों की सप्लाई की जाती है।
देते हैं होम डिलीवरी की सुविधा
ध्यानदास ने बताया कि मसाला इकाई से हुई आमदनी से उन्होंने ऑटो खरीद लिया ,जिसकी सहायता से वे उत्पादों की होम डिलीवरी भी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मसाला हल्दी, मिर्च, धनिया की होम डिलीवरी के साथ-साथ अब विभिन्न प्रकार के अचार, सांभर मसाला, पंजाबी मसाला, महाराष्ट्रीयन मसाला आदी की बिक्री हो रही है।
मसालों की शुद्धता के कारण उनकी ख्याति और उपभोक्ता दोनों में लगातार वृद्धि हो रही है। वे कहते हैं योजना से मिली सहायता ने मेरा और मेरे परिवार के सदस्यों का जीवन बदल दिया है।
महिलाओं को मिला रोज़गार
ध्यानदास बताते हैं कि मसाले की मांग होेने पर मैंने अन्य लोगों को अपनी मसाला इकाई में रोज़गार दिया है, जिसमें 7 महिलाएं शामिल हैं। उन्होंने बताया कि वे हर महीने प्रति महिला को लगभग 10 हजार रुपये प्रति महिला वेतन के रूप में दे रहे हैं।
वे कहते हैं कि मसाला उद्योग इकाई में शुद्ध मसाले तैयार किए जाते हैं जिन्हें ग्राहक काफी पसंद कर रहे हैं। मसाला घर-घर जा कर बेंचने से मेरा संपर्क बढ़ा और विक्रय में वृद्धि होती जा रही है।