विमुक्त घुमंतू जनजाति कल्याण संघ के सामाजिक सशक्तिकरण की ओर बढ़ते कदम

विमुक्त घुमंतू जनजाति कल्याण संघ के सामाजिक सशक्तिकरण की ओर बढ़ते कदम
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राजेश कुमार, विमुक्त घुमंतू जनजाति कार्यों के विशेषज्ञ
31 अगस्त विमुक्ति दिवस पर विशेष

देश की आजादी के बाद भी स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वाली ऐसी 193 से अधिक जातियां हैं जो सदा आजाद भारत की सरकारों की उपेक्षा की शिकार रही है इन जातियों को हम विमुक्त घुमंतू जनजाति के नाम से जानते हैं।

इन लोगों की देशभर में लगभग 20 करोड़ से अधिक जनसंख्या अलग-अलग जातियों के रूप में समाहित है । बात अगर इतिहास की करें तो अलाउद्दीन खिलजी से लेकर औरंगजेब तक विदेशी आक्रांताओं के विरुद्ध, अपने योद्धाओं को हथियार बनाकर देना और गुपचुप टोली बना कर आमने-सामने के युद्ध में डटकर लड़ाई लड़ना, भेष बदलकर, स्वांग रचकर गुप्तचरी करना, सैनिकों को गीत कविताओं के माध्यम से वीर रस से ओत प्रोत करना। यहां तक ही नहीं बल्कि इस समाज ने देश के हर कोने से 1857 की क्रांति में भी खूब बढ़ चढ़कर भाग लिया।

फिर 1871 में अंग्रेजों ने योजना पूर्वक क्रिमिनल ट्राइब एक्ट बनाकर इन जातियों को आपराधिक श्रेणी में रखकर इन पर अनेक काले कानून लगा दिए जिसके कारण इन्हें प्रतिदिन थाने में हाजिरी देनी पड़ती थी। न्यायालय जाने की अनुमति नहीं थी। किसी गांव में प्रवेश से पहले सरपंच को सूचना देनी पड़ती थी। 1924 आते-आते 12 वर्ष के बच्चों को भी इस कानून ने अपनी गिरफ्त में ले लिया। इन बच्चों के माथे पर ग्रम सिक्के से निशान लगाया जाता था ताकि इनकी पहचान आसानी से की जा सके। अंग्रेजों ने कई बार इन पर कठोर से कठोर कानून बनाए हमारे लिए दुख का विषय यह रहा कि देश के स्वतंत्र होने के पश्चात भी अंग्रेजों द्वारा बनाए कानून को नहीं हटाया गया।

नेताजी सुभाषचंद्र बोस की आजाद हिंद फौज मे बहुत बडी संख्या मे यह जनजातियां सहभागी थी। भारत के दक्षिण की इनमें से कुछ जनजातियों को वाॅरियर ट्राईब्स भी कहा जाता है। जैसे कि तामिलनाडू कि "मारवार" जनजाति। इस अकेले मारवार जनजाति से 50 हजार से ज्यादा सैनिक आजाद हिंद फौज मे समिल्लित थे। आज भी तमिलनाडु जाओगे तो हर विमुक्त घुमंतू जनजाति व्यक्ति के घर मे आपको नेताजी सुभाषचंद्र बोस जी का चित्र लगा मिलेगा।

स्वतंत्रता के 5 साल 16 दिन बाद सरदार वल्लभ भाई पटेल के प्रयासों से बनी अयंगर कमेटी की सिफारिश पर 31 अगस्त 1952 को इस कानून को हटा दिया गया। लेकिन तब भी इन्हें पूर्ण स्वतंत्रता नहीं मिली क्योंकि तत्कालीन सरकार ने 1952 में ही इन पर हैबिट्यूल ऑफेंडर एक्ट लगा दिया। जिसे आदतन अपराधी के नाम से जाना जाता है। कोई भी आपराधिक गतिविधि होने पर पुलिस अक्सर इन्हें उठाकर पूछताछ करती थी और अत्याचार करती थी।

यह मुक्ती दिवस तो है लेकिन अगर दुसरी तरफ देखें तो यह इन जनजातियोंके लिए काला दिवस भी है। क्योंकि तत्कालीन सरकार ने इनको क्रिमिनल ट्राइब्स ॲक्ट से निकाल कर हॅबिच्युल ऑफंडर्स ॲक्ट(अभ्यस्त/आदतन अपराधी कानून) मे सम्मलित किया। एक तरह से यह उस समय कि केंद्र सरकार ने इन जनजातियों पर अन्याय ही किया है। समय बीतता गया और इनकी स्थिति बद से बदतर होती गई। केंद्र सरकारों ने समय-समय पर इनके अध्ययन/कल्याण हेतु कई आयोग कमेटी बनाई। सिफारिशें आई, परंतु उन पर कार्य नहीं हुआ। सरकारें बदलती रही लेकिन नहीं बदली तो इनकी चुनौतियां।

कहते हैं अगर अच्छे दिन नहीं रहे तो बुरे दिन भी नहीं रहते। इसी के चलते भाजपा सरकार ने भिकू रामजी इदाते(दादा) जी के अध्यक्षता में राष्ट्रीय आयोग (इदाते आयोग) जनवरी, 2015 में बनाया। जिसने देशभर में घूमकर इनकी स्तिथि परिस्थिति को समझकर 8 जनवरी 2018 को अपनी रिपोर्ट सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय को सौंप दी। जिसपर कार्य संतोष जनक रूप से चल रहा है। कुछ ही राज्य सरकारें रुचि ले रही हैं, जबकि सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है।

सामाजिक स्तर पर हरियाणा के पानीपत से 2014 में एक संगठित प्रयास आरंभ हुआ और एक संस्था ने स्वरूप लिया जिसका नाम था विमुक्त घुमंतू जनजाति कल्याण संघ जिसने अपना लक्ष्य रखा रोटी कपड़ा और मकान शिक्षा स्वास्थ्य स्वाभिमान के साथ संवैधानिक अधिकार हरियाणा के कल्याण संघ का पहला कार्य सभी जिलों में खंड व ब्लॉक स्तर तक जाकर इन जातियों में कार्य करने वाली संस्था व कार्यकर्ताओं से संपर्क कर और उन्हें कल्याण संघ की योजनाओं से अवगत करवाया गया और उन्हें एक साथ जोड़ा गया। मात्र 1 वर्ष बाद ही 30 अगस्त 2015 को पानीपत में विमुक्ति दिवस के रूप में मनाया गया। जिसमें 10000 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया और हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल स्वयं अपनी कैबिनेट के साथ वहां उपस्थित हुए। तत्पश्चात 17 सितंबर फतेहाबाद में 62000 से अधिक लोग उपस्थित हुए जिसके साक्षी स्वयं दादा ईदाते बने।

गुरु गोरखनाथ, सुपंच ऋषि, संत सेवालाल, बिरसा मुंडा, संत लाधुनाथ, देवी अहिल्याबाई होल्कर, महाराजा रणजीत सिंह, बाबा मक्खन शाह, बाबा लक्खीशाह जैसे महापुरूष व संतो को ये समाज अपना इष्ट देव मानता है इनके जन्मोत्सव मना कर स्वाभिमान जगाना, मुख्य कार्य किया। क्रांतिकारी सुल्ताना, गुरुगोविंद, वीर महाडतिया डालचंद्र, वडडे ओबान्ना, छोटनलाल उपाध्याय, मनभरनाथ, भीमा नायक, उमाजी नाइक, झलकारी बाई, टीकासिंह अहेरिया जैसे महानायकों की जीवनी से अवगत करा कर गौरव का भाव जगाया।

हरियाणा सरकार और कल्याण संघ के सहयोग से विमुक्त घुमंतू जाति के लोगों के लिए कार्य किया जाने लगा व इन सभी जातियों का आर्थिक सामाजिक और शैक्षणिक तथा मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष किया गया। हरियाणा में लगभग 12000 से ज्यादा बेघर परिवारों का सर्वेक्षण करवाया जा चुका है। आज विमुक्त घुमंतू जनजाति कल्याण संघ द्वारा हरियाणा में अनेक कार्य जैसे इन जातियों के लिए राशन कार्ड ,आधार कार्ड, फैमिली आईडी, बिजली कनैक्शन, बैंक खाता, रहने की व्यवस्था, बच्चों के लिए शिक्षा जैसे कार्य किए जा रहे हैं ।

कल्याण संघ के अथक प्रयासों से हरियाणा में हैबिट्यूल ऑफेंडर एक्ट 1952 से विमुक्त घुमंतू जनजाति के लोगों को मुक्त कर दिया गया, पुलिस के पाठ्यक्रम से हटाया ताकि वह सामान्य जीवन व्यतीत कर सकें। इस कानून को हटाने वाला हरियाणा पहला राज्य बना। अपराधी के साथ जाति सूचक शब्द पुलिस द्वारा व अखबारों के द्वारा लिखना बंद करवाया। गोरख धंधा शब्द गलत कामों के लिए उपयोग किया जाता था। जिस से गुरु गोरखनाथ को मानने वाले श्रद्धालुओं को ठेस पहुंचती थी। हरियाणा प्रशासन व प्रसार भारती ने लिखित में प्रतिबंधित किया है।

आज जिला कष्ट निवारण समितियों में स्थान दिलाने तथा प्रत्येक ब्लॉक सत्र पर अंत्योदय अधिकारी को नियुक्त करवाने में कल्याण संघ की मुख्य भूमिका रही है। आज कल्याण संघ द्वारा समय-समय पर इनके लिए कैंप लगाए जाते हैं। आज चौक, चौराहों, संस्थानों के नाम विमुक्त घुमंतू जनजातियों के आदर्श महापुरुषों के नाम से हो रहे हैं तथा शिक्षा स्वच्छता के प्रति जागरूकता, संस्कार केंद्र, स्थानीय स्तर पर बस्तियों में पानी, बिजली की व्यवस्था, सामाजिक कुरुतियों के प्रति जागरूकता का प्रयास संगठन द्वारा निरंतर किया जा रहा है।

कल्याण संघ के अथक प्रयास फलस्वरूप आज शासन, प्रशासन राजनेताओं, जननेताओं व नागरिकों में इस समुदाय को पहचान व स्थान मिला है। कल्याण संघ के प्रयासों की जागरूकता के परिणाम स्वरूप आज हरियाणा में सभी राजनैतिक दलों ने अपने प्रकोष्ठ घोषित किए हैं। विमुक्त घुमंतू जनजाति कल्याण संघ आज अपने भाई बंधुओं को समाज में सम्मान व खोई पहचान दिलाने के लिए कार्यरत है।भारत के संस्कृती का रक्षण, संवर्धन तथा प्रचार और स्वाधीनता संग्राम आद्यक्रांतिकारक रहे। हजारो शुरवीर इतिहास मे गुमनाम हैं। इन्हे खोजकर समाज एवं सरकार के सामने लाने का महत्वपूर्ण कार्य कल्याण संघ कर रहा है।

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