'वैश्विक शक्ति' भारत के और करीब आएगा अमेरिका

स्रोत: न्यूज़ नेटवर्क      तारीख: 21-Dec-2017


नई दिल्ली।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी बहुप्रतीक्षित राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति की घोषणा कर दी है। दुनिया भर में इस नीति की चर्चा इसलिए हो रही है कि ट्रंप ने चीन को अपना एक बड़ा प्रतिद्वंद्वी मानते हुए इससे निपटने की बात कही है। ट्रंप प्रशासन ने भारत को अपना एक अहम रक्षा और रणनीतिक सहयोगी करार देते हुए द्विपक्षीय रिश्तों को प्रगाढ़ करने की बात कही है।

इससे साफ है कि भारत-अमेरिका की मित्रता आने वाले कुछ वर्षों तक वैश्विक कूटनीति में अहम बदलाव लाने वाले साबित होंगे। अमेरिका ने न सिर्फ भारत को एक अग्रणी वैश्विक शक्ति के तौर पर चिह्नित किया है, बल्कि अहम मुद्दों पर भारतीय रुख का खुलेआम समर्थन करने को भी तैयार दिखता है। सुरक्षा पर ट्रंप प्रशासन की यह पहली नीति है जिसमें अमेरिका ने निकट भविष्य में अपने हितों के समक्ष उत्पन्न चुनौतियों और उनके खिलाफ भावी रणनीति को पेश किया है। इसमें चीन के कई कदमों की आलोचना की गई है। मसलन, दक्षिण चीन सागर समेत दुनिया के अन्य हिस्सों में चलाए जा रहे चीन की वन बेल्ट, वन रोड (ओबोर) परियोजना का जिक्र कर कहा गया कि इनकी वजह से कई देशों की संप्रभुता का हनन हो रहा है। इसे भारत के संदर्भ में भी देखा जा सकता है। क्योंकि गुलाम कश्मीर में चीन की ओबोर परियोजना का एक बड़ा हिस्सा गुजर रहा है। इस वजह से भारत इसका कड़ा विरोध करता है। पिछले दिनों जब ओबोर पर चीन ने वैश्विक सम्मेलन बुलाया था तब भारत ने यह कहते हुए हिस्सा नहीं लिया था कि यह परियोजना उसकी संप्रभुता को नुकसान पहुंचा रहा है। अक्टूबर, 2017 में अमेरिका और भारत के विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद जारी विज्ञप्ति में पहली बार यह संकेत दिया गया था कि अमेरिका संप्रभुता के मुद्दे पर भारत के पक्ष में आ रहा है।

इस रणनीति में कहा गया है, 'हम भारत के एक वैश्विक शक्ति के तौर पर उद्भव का स्वागत करते हैं। हम भारत, जापान, आस्ट्रेलिया के साथ चार देशों के सहयोग को भी बढ़ाएंगे।' सनद रहे कि नवंबर, 2017 में पहली बार उक्त चार देशों की बैठक मनीला में हुई थी। वैश्विक कूटनीति के जानकार मानते हैं कि शीत युद्ध काल के बाद पहली बार कुछ अहम शक्तियों का एक रणनीतिक गठबंधन बन रहा है। लेकिन अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में इसके जिक्र का अलग महत्व है। वैसे ट्रंप प्रशासन की इस अहम नीति में भारत का जिक्र आठ बार किया गया है।