महापौर की नई पहल: प्लास्टिक बोतल की जगह अब तांबे के लोटे में पीने का पानी

स्रोत: न्यूज़ नेटवर्क      तारीख: 22-Jun-2017

इंदौर। पहले अपनों को सुधारेंगे और अपना लक्ष्य है, उसे पूरा करेंगे। इस सूत्र को लेकर महापौर मालिनी गौड़ ने एक नई शुरुआत अपनी पारी के आधे कार्यकाल से कर दी है। शुरुआत भी उन्होंने स्वयं के सचिवालय से की है।
शहर को प्लास्टिक मुक्त करने के लक्ष्य को लेकर महापौर ने कई प्रयास किए हैं। उन्होंने अपने इस लक्ष्य को लेकर कई मर्तबा सार्वजनिक रूप से कहा है कि उनके पति स्व. लक्ष्मणसिंह गौड़ का लक्ष्य था कि शहर को प्लास्टिक मुक्त किया जाना चाहिए। इसी को ध्यान में रखते हुए महापौर ने सबसे पहले अपने सचिवालय से इसकी शुरुआत की है। यहां पर आने वाले आमजन से लेकर मंत्री, संतरी, निगम के वरिष्ठ अफसरों को तांबे के लोटे में पानी पीने को दिया जाता है।

पिछले दिनों इस कार्यप्रणाली की तारीफ उत्तर प्रदेश से आए मंत्री ने की थी और इसे एक अनूठा कार्य भी बताया था। महापौर स्वयं भी बोतल बंद पानी का उपयोग नहीं करती हैं। उनकी अपनी स्वयं की तांबे की बोतल है, जिसमें पानी भरकर उन्हें दिया जाता है। पिछले दिनों नगर निगम बजट बैठक में जब अफसरों और पार्षदों को पानी की बोतल दी जा रही थी तब ब्रिलियंट कान्वेंट सेंटर प्रशासन उनके लिए तांबे की बोतल में पानी भरकर उपलब्ध करवा रहा था। इस व्यवस्था को और बढ़ावा देने के लिए नगर निगम मुख्यालय में नई तरह की शुरुआत की गई है। हर मंगलवार को होने वाली जनसुनवाई में बड़ी संख्या में पानी की बोतल अफसरों और कर्मचारियों के बीच दी जाती थी।

जनसुनवाई में देखने को आया कि निगम के तमाम अफसर और कर्मचारी ताम्बे के लोटे में पानी पी रहे थे। निगम मुख्यालय के सभी कार्यालयों पर अब तांबे के लोटे रखने की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही जोनल कार्यालयों पर भी ऐसी व्यवस्था करने को लेकर काम किया जा रहा है। वैसे भी अगर चिकित्सा विशेषज्ञों की मानें तो तांबे के लोटे में पानी पीने से एक फायदा यह भी है कि इससे पाचन क्रिया जहां ठीक रहती है, वहीं स्फूर्ति बनी रहती है। हृदय रोग से काफी निजात मिलती है। शहर में इस तरह का प्रयोग शहर के तमाम शवदाह गृह पर सतत् रूप से चल रहा है। बड़े-बड़े समाजों द्वारा यहां आने वाले लोगों को तांबे के लोटे में ही पानी दिया जा रहा है।

पहले हम अपनों को सुधारेंगे

तांबे के लोटे में पानी पिलाना एक संस्कृति को बढ़ावा देना है। पहले हम अपनों को सुधारेंगे। इसलिए हमने सचिवालय में इसकी शुरुआत सबसे पहले की है। अब निगम में भी यह व्यवस्था लागू की जा रही है। सभी अफसरों को लोटे में पानी दिए जाने की व्यवस्था की जा रही है।

मालिनी गौड़, महापौर