श्रावण मास - इस माह में दान करने से मिलता है आत्म सुख

स्रोत: न्यूज़ नेटवर्क      तारीख: 10-Jul-2017

 
सोमवार से श्रावण की शुरुआत हो चुकी है। उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर में आज श्रावण के पहले सोमवार को ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और उन्होंने भगवान महाकाल के पूजन-अर्चन कर दर्शनलाभ लिया। मंदिर में अलसुबह से ही लोगों का आने का सिलसिला शुरू हो गया था, जो दोपहर तक जारी रहा।

दरअसल, श्रावण माह हिन्दू पंचांग में पांचवे स्थान पर आता है। इस समय चौमासा (चार्तुमास) प्रारंभ हो गया है। श्रावण माह में सोमवार का विशेष महत्व है। हिन्दू समाज में श्रावण माह का अधिक महत्व है। चौमासा (वर्षा ऋतु) में सभी जाति-धर्म के तीज त्यौहार प्रारंभ होकर अपनी-अपनी मान्यताओं के अनुरूप त्यौहारों को मनाते है। चौमासा में श्रावण का महीना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

श्रावण माह भगवान शिव के लिए अधिक प्रिय होने के कारण अलग-अलग तरीके से भगवान शिव की पूजा की जाती है। पूरे श्रावण माह में धार्मिक उत्सव, शिव उपासना, व्रत, पवित्र नदियों में स्नान एवं भगवान शिव का जलाभिषेक और विशेष तौर से श्रावण माह के सोमवार की पूजा का अत्यधिक महत्व है। इस दौरान दान एक ऐसा कार्य है, जिसके जरिये हम न केवल अपने धर्म का ठीक-ठीक पालन कर पाते है बल्कि अपने जीवन की तमाम समस्याओं से भी निकल सकते है। दान का विशेष महत्व है। दान करने से ग्रहों की पीड़ा से भी मुक्ति पाना आसान हो जाता है। दान में जैसे- अनाज का दान हो या विभिन्न प्रकार की धातुओं का दान या नवीन वस्त्रों का दान आदि किया जाना चाहिए।दान करने से दानदाता को अद्धभुत आत्मसुख की प्राप्ति होती है और इंसान को श्रेष्ठ और सत्कर्मी बनाता है। दान करने से आनंद की अनुभूति होती है।

श्रावण मास में हरियाली तीज, नागपंचमी, रक्षाबंधन आदि पर्व मनाये जायेंगे। श्रावण माह की पूर्णिमा का दिन बहुत शुभ एवं पवित्र माना जाता है। ग्रंथों में इन दिनों किये गये जप, तप व दान का महत्व उल्लेखित है। रक्षाबंधन पर्व, श्रावणी उपाक्रम आदि का अधिक महत्व है। श्रावण माह में दान करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते है।