अमरनाथ यात्रा 2026 शुरू होने से पहले बाबा बर्फानी यानी बर्फ से बने प्राकृतिक शिवलिंग की पहली तस्वीरें सामने आ गई हैं। सामने आई तस्वीरों में गुफा के भीतर 5 से 6 फीट ऊंचा शिवलिंग आकार लेता दिखाई दे रहा है। सबसे पहले सुरक्षा में तैनात BSF जवानों ने बाबा बर्फानी के दर्शन किए।इस साल अमरनाथ यात्रा 2026 3 जुलाई से शुरू होकर 9 अगस्त 2026 तक चलेगी। यात्रा को लेकर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने तैयारियां तेज कर दी हैं।
3.6 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने कराया रजिस्ट्रेशन
अधिकारियों के मुताबिक, इस बार अमरनाथ यात्रा के लिए अब तक 3.6 लाख से ज्यादा श्रद्धालु रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। माना जा रहा है कि यात्रा शुरू होने तक यह आंकड़ा 5 लाख के पार पहुंच सकता है।रजिस्ट्रेशन 15 अप्रैल से शुरू हुए थे। फिलहाल 5 से 30 लोगों के ग्रुप रजिस्ट्रेशन बंद कर दिए गए हैं, लेकिन व्यक्तिगत और छोटे समूहों के लिए स्लॉट उपलब्ध रहने तक प्रक्रिया जारी रहेगी।
दो रास्तों से शुरू होगी यात्रा
यात्रा इस बार बालटाल-सोनमर्ग और पारंपरिक नुनवान-पहलगाम मार्ग से संचालित होगी। 57 दिन की यह यात्रा रक्षा बंधन और सावन पूर्णिमा के दिन संपन्न होगी।रास्तों पर अभी भी कई जगह भारी बर्फ जमा है। सामान्य इलाकों में 6 से 8 फीट और हिमस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में 10 से 12 फीट तक बर्फ मौजूद है। सीमा सड़क संगठन (BRO) लगातार ट्रैक साफ करने और रास्तों को चौड़ा करने में जुटा है।
यात्रा मार्ग पर तेजी से चल रहा काम
अधिकारियों के अनुसार, बालटाल मार्ग पर 9 किलोमीटर और पहलगाम मार्ग पर 8 किलोमीटर तक बर्फ हटाने का काम पूरा हो चुका है। ट्रैक को 12 फीट चौड़ा किया जा रहा है।इसके अलावा रिटेनिंग वॉल, कल्वर्ट और सुरक्षा ढांचे को भी मजबूत किया जा रहा है। प्रशासन का दावा है कि 15 जून तक दोनों मार्ग पूरी तरह तैयार कर दिए जाएंगे।
इस बार टेंट नहीं, आधुनिक स्ट्रक्चर में ठहरेंगे श्रद्धालु
इस बार श्रद्धालुओं के लिए बेस कैंप में नई सुविधाएं तैयार की जा रही हैं। पारंपरिक टेंट की जगह प्री-फैब्रिकेटेड और फाइबर स्ट्रक्चर बनाए गए हैं, ताकि खराब मौसम और बारिश में यात्रियों को परेशानी न हो।हर इमारत में 48 कमरे बनाए गए हैं। कमरों में अटैच्ड वॉशरूम, गर्म और ठंडे पानी की सुविधा और पैंट्री जैसी सुविधाएं भी होंगी।
संवेदनशील इलाकों को बनाया गया नो-एंट्री जोन
प्रशासन ने इस बार सुरक्षा और आपदा प्रबंधन पर खास फोकस किया है। बादल फटने और अचानक बाढ़ की घटनाओं को देखते हुए संवेदनशील क्षेत्रों को ‘नो-एंट्री जोन’ घोषित किया गया है।साथ ही, बाढ़ संभावित इलाकों में कैंप लगाने पर रोक लगाई गई है। दोनों यात्रा मार्गों पर पुलों और सुरक्षा व्यवस्थाओं को भी पहले से ज्यादा मजबूत किया गया है।