Delhi Liquor Case: HC Notice

शराब नीति केस: दिल्ली हाईकोर्ट ने केजरीवाल-सिसोदिया समेत 21 को नोटिस, 16 मार्च को सुनवाई

दिल्ली शराब नीति केस में दिल्ली हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत 21 अन्य को नोटिस जारी किया। CBI ने ट्रायल कोर्ट के बरी करने के फैसले को चुनौती दी है, 16 मार्च को सुनवाई होगी।

By : स्वदेश डेस्क
शराब नीति केस: दिल्ली हाईकोर्ट ने केजरीवाल-सिसोदिया समेत 21 को नोटिस, 16 मार्च को सुनवाई

नई दिल्ली। चर्चित दिल्ली शराब नीति मामले में सोमवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। Delhi High Court ने केंद्रीय जांच एजेंसी Central Bureau of Investigation (CBI) की अपील पर पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal, पूर्व उपमुख्यमंत्री Manish Sisodia समेत कुल 21 लोगों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने इन सभी से जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को तय की है।

CBI ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को दी चुनौती

दरअसल, इस मामले में पहले ट्रायल कोर्ट ने सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया था। इसके खिलाफ CBI ने हाई कोर्ट में अपील दाखिल की।CBI का कहना है कि ट्रायल कोर्ट के फैसले में कई कानूनी और तथ्यात्मक पहलुओं पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया। इसलिए इस आदेश को रद्द कर मामले की दोबारा सुनवाई की जानी चाहिए।

किन-किन को भेजा गया नोटिस

हाई कोर्ट ने जिन लोगों को नोटिस जारी किया है उनमें आम आदमी पार्टी के कई नेता और इस मामले से जुड़े अन्य आरोपी शामिल हैं। मुख्य रूप से जिन नामों पर नोटिस जारी हुआ है, उनमें Arvind Kejriwal, Manish Sisodia और मामले से जुड़े कुल 21 अन्य आरोपी हैं, सभी से अदालत ने पूछा है कि ट्रायल कोर्ट के फैसले को क्यों बरकरार रखा जाए।

क्या है पूरा शराब नीति मामला

दिल्ली सरकार की नई आबकारी नीति को लेकर यह विवाद शुरू हुआ था। आरोप लगाए गए कि नीति बनाते समय कुछ निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए अनियमितताएं की गईं।इसी मामले में Central Bureau of Investigation और Enforcement Directorate ने अलग-अलग जांच भी की थी। हालांकि ट्रायल कोर्ट ने सबूतों के आधार पर पहले सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। अब CBI उसी फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट पहुंची है। 

16 मार्च को अगली सुनवाई

हाई कोर्ट ने सभी पक्षों को नोटिस जारी करते हुए 16 मार्च को अगली सुनवाई तय की है। अब इस मामले में आगे क्या रुख रहता है, इस पर राजनीतिक और कानूनी हलकों की नजर बनी हुई है। क्योंकि यह केस पिछले कुछ वर्षों से देश की सबसे चर्चित राजनीतिक जांचों में से एक माना जाता रहा है।

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