Drug Menace Grips MP and Chhattisgarh Cities, Yout

नशे का शिकंजा, सिसकते शहर

भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर समेत एमपी-छत्तीसगढ़ के शहर नशे की गिरफ्त में हैं। स्मैक और MD ड्रग्स से युवा पीढ़ी खतरे में

By : नरेंद्र कुमार
नशे का शिकंजा, सिसकते शहर

आधुनिकता के नाम पर युवाओं में बढ़ते नशे के प्रचलन ने किसी भी शहर, कस्बे या गांव को अछूता नहीं छोड़ा है। हर तरफ नशे में डगमगाते युवक-युवतियों के कदम दिखाई देने लगे हैं। एक ओर मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल, तो दूसरी ओर व्यावसायिक राजधानी और मां अहिल्या की पावन नगरी इंदौर दोनों ही शहरों में नशे ने अपने पैर मजबूती से पसार लिए हैं। वहीं जबलपुर, ग्वालियर, सतना जैसे बड़े शहरों में भी युवा तेजी से नशे की गिरफ्त में आते जा रहे हैं।

इसी तरह छत्तीसगढ़ भी अब ‘उड़ता पंजाब’ की राह पर चलता नजर आ रहा है। दोनों ही प्रदेशों में अब केवल शराब और गांजा ही नशे के साधन नहीं रह गए हैं, बल्कि सूखा पाउडर, अफीम, स्मैक और एमडी ड्रग्स जैसे घातक नशों ने युवाओं को बुरी तरह जकड़ लिया है। यदि समय रहते हालात नहीं सुधारे गए, तो स्थिति और भी बदतर हो सकती है।

‘स्वदेश’ द्वारा मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के कुछ चुनिंदा शहरों में पनपते नशे के इस शिकंजे और उससे शहरों व परिवारों की सिसकती रूह को क्रमवार प्रकाशित किया जा रहा है। 

बात मध्यप्रदेश के बड़े शहरों की

भोपाल

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल आज एक गहरे और खतरनाक सामाजिक संकट के मुहाने पर खड़ी नजर आ रही है। वहां पर 50-100 में पुड़िया मिल रही है, वही 16 क्विंटल गांजे की खपत का अनुमान लगाया गया है। शहरों में बसी निचली बस्तियों में नशा आसानी से उपलब्ध हो रहा है, रोजाना 25-30 किलो ड्रग्स तैयार होकर बिक रही है।

ग्वालियर

ग्वालियर में अधिकांश तौर पर नशेड़ी स्मैक, गांजा और शराब का नशा करते हैं। अब इस नशे की लत का युवा वर्ग भी आदी हो चला है। स्मैक के नहते की लत के कारण कई परिवार उजड़ गए। नशा कारोबार कभी तस्करों तक ही सीमित था लेकिन आज इसे नाबालिग और महिलाएं भी बेच रही हैं। वही हुक्का बारों ने भी अपने पैर पसार लिए हैं। नशे के इस खेल में विदेशी लिंक का भी अनुमान.

इंदौर

इंदौरी युवाओं को एमडी ड्रग्स (मेफेड्रोन) ने बहुत तेजी से अपने शिकंजे में कस लिया है। संपूर्ण मालवा निमाड़ के ग्रामीण अंचलों तक इंदौर शहर से ही राहो नशे की होप पहुंच रही है। इंदौर में शराब, गांजा, अफीम, स्मैक और एमडी इम्स जैसे घातक नशों का जाल बहुत अंदर तक फैल चुका है। मालया में एमडी इग्स कंपनियां मिल रही हैं।

जबलपुर

जबलपुर शहर यत्रे संस्कारधानी कहा जाता है, मगर अब यह नशे का एक बड़ा गढ़ चन प्रया है। लगातार युवाओं में बढ़ती नशे की लत का नतीजा ही है कि वर्षभर में 400 करोड़ का गांजा चिक जाता है। इस कारोबार में केवल तस्वर ही नहीं बल्कि विद्यार्थी और महिलाएं भी शामिल हो गई है। यहां पर राजस्थान से एमडी ड्रग्स की सप्लाई होती है वही हुक्का बार और ई-सिगरेट का चलन भी बढ़ा है.

बात छत्तीसगढ़ की...

छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक अनदेखी और नशे का बढ़ता नेटवर्क युवा पीढ़ी पर खतरा बनता जा रहा है। यहां पर ड्रग्स का अनुमानित कारोबार 300 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। इस नशे की गिरफ्त में निजी विश्वविद्यालयों के छात्र, हॉस्टल/पीजी में रहने वाले युवक, नाइट पार्टी और वलब कल्चर से युवा बड़ी संख्या में जुड़े.

ओडिशा, छत्तीसगढ़ और झारखंड से लगातार नशे की स्मगलिंग होने से विंध्य क्षेत्र आज नशे के संगठित कारोबार की गिरफ्त में आ चुका है। सतना, रीवा, सीधी सिंगरौली, शहडोल और अनूपपुर जैसे जिलों में गांजा, अफीम, स्मैक, कोरेक्स सिरप और अवैध शराब की तस्करी अब छुटपुट अपराध नहीं, बल्कि एक नियोजित नेटवर्क का रूप ले चुका

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