नई दिल्ली। रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत को फिलहाल बड़ी राहत मिल गई है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने भारतीय रिफाइनरियों को 30 दिनों का विशेष लाइसेंस दिया है, जिसके तहत भारत रूस से तेल खरीद सकता है। यह छूट 3 अप्रैल तक वैध रहेगी।
इस फैसले के बाद भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर संभावित दबाव फिलहाल कम माना जा रहा है। हालांकि, अमेरिका के इस कदम ने देश की राजनीति में नई बहस भी छेड़ दी है। विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाया है कि भारत को किसी भी देश से तेल खरीदने के लिए अमेरिका की अनुमति की जरूरत क्यों पड़नी चाहिए।
अमेरिका ने क्यों दी भारत को छूट
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने 6 मार्च को कहा कि यह फैसला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ऊर्जा एजेंडे के तहत लिया गया है। बेसेंट के मुताबिक भारत अमेरिका का अहम साझेदार है और वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने के लिए यह अस्थायी छूट दी गई है। उन्होंने कहा कि ईरान वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, ऐसे में सप्लाई चेन को संतुलित रखना जरूरी है।
बेसेंट ने यह भी उम्मीद जताई कि भविष्य में भारत अमेरिका से भी तेल खरीद बढ़ा सकता है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) ने यह विशेष लाइसेंस जारी किया है।
समुद्र में मौजूद टैंकरों से ही होगी सप्लाई
इसके तहत केवल वही रूसी कच्चा तेल भारत को मिल सकेगा, जो 5 मार्च तक जहाजों पर लोड हो चुका है। यानी जो टैंकर पहले से समुद्र में हैं, उन्हीं से तेल की डिलीवरी की अनुमति होगी।
एशियाई जल क्षेत्र में इंतजार कर रहे रूसी टैंकर
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक भारत उन रूसी तेल टैंकरों को खरीदने पर विचार कर रहा है जो इस समय एशियाई समुद्री क्षेत्र के आसपास मौजूद हैं। करीब 95 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल इस समय टैंकरों में लोड होकर एशियाई देशों के पास इंतजार की स्थिति में है। अगर भारत इन टैंकरों से तेल लेता है तो ट्रांसपोर्टेशन का समय और लागत दोनों कम हो सकते हैं। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का उपभोक्ता है और अपनी जरूरत का लगभग 88% तेल विदेशों से आयात करता है।
रूस से तेल खरीदता रहा है भारत
यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कई प्रतिबंध लगाए थे। पिछले साल नवंबर में ट्रम्प प्रशासन ने रूसी तेल कंपनियों लुकोइल और रोजनेफ्ट पर भी कड़े प्रतिबंध लगाए थे। इसके चलते जनवरी में भारत का रूसी तेल आयात घटकर करीब 11 लाख बैरल प्रति दिन रह गया था, जो नवंबर 2022 के बाद सबसे कम था। हालांकि फरवरी में यह हिस्सा फिर बढ़कर लगभग 30% तक पहुंच गया।
अमेरिका के बयान पर भारत में सियासी प्रतिक्रिया
अमेरिका के इस बयान के बाद भारत में विपक्षी नेताओं ने सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए हैं। केजरीवाल ने पूछा कि अमेरिका कौन होता है अनुमति देने वाला? आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि भारत को रूस से तेल खरीदने की इजाजत देने वाला अमेरिका कौन होता है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार किसी मजबूरी के कारण अमेरिका के सामने झुक रही है, तो देश के हित में प्रधानमंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए।
राहुल गांधी ने भी उठाए विदेश नीति पर सवाल
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति देश के इतिहास, भौगोलिक स्थिति और मूल्यों पर आधारित होनी चाहिए। राहुल गांधी ने लिखा कि मौजूदा हालात किसी स्पष्ट नीति का नहीं बल्कि “समझौता कर चुके व्यक्ति के शोषण” का परिणाम दिखाई देते हैं।