मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अहम फैसला लिया है। ईरान ने भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान को इस समुद्री मार्ग से गुजरने की अनुमति दी है। यह जानकारी मुंबई स्थित ईरानी कॉन्सुलेट के हवाले से सामने आई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि ‘मित्र देशों’ को शर्तों के साथ यह छूट दी जा रही है।
पूरी तरह बंद नहीं है होर्मुज
ईरान पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह बंद नहीं है। यह मार्ग केवल उन देशों के लिए प्रतिबंधित है जो ईरान के खिलाफ हैं। अन्य देशों के जहाजों को सीमित शर्तों के साथ गुजरने दिया जा रहा है, ताकि समुद्री आवाजाही पूरी तरह प्रभावित न हो।
भारत के लिए क्यों अहम है फैसला
भारत के लिए यह फैसला अहम माना जा रहा है, क्योंकि देश अपनी कुल तेल जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। भारत की लगभग 55 से 60 प्रतिशत तेल आपूर्ति खाड़ी देशों से आती है और होर्मुज स्ट्रेट इस सप्लाई का प्रमुख रास्ता है। ऐसे में इस मार्ग के खुले रहने से कच्चे तेल की सप्लाई और कीमतों पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। साथ ही जहाजों की आवाजाही सामान्य रहने से ट्रांसपोर्ट और बीमा लागत में भी कमी आ सकती है।
F-18 जेट गिराने का दावा और विवाद
इसी बीच ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दावा किया है कि उसने एक अमेरिकी F/A-18 फाइटर जेट को मार गिराया है। ईरान के अनुसार यह घटना उसके दक्षिणी तटीय इलाके के पास हुई। हालांकि, अमेरिका ने इस दावे को खारिज कर दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड का कहना है कि उसका कोई भी फाइटर जेट नष्ट नहीं हुआ है और वायरल हो रहे वीडियो की पुष्टि नहीं हुई है।
अमेरिका का 15 पॉइंट प्रस्ताव
वहीं, अमेरिका ने युद्ध खत्म करने के लिए ईरान को 15 बिंदुओं का प्रस्ताव भेजा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह प्रस्ताव पाकिस्तान के जरिए तेहरान तक पहुंचाया गया। इसमें परमाणु कार्यक्रम पर रोक, यूरेनियम संवर्धन सीमित करने, मिसाइल कार्यक्रम पर नियंत्रण और होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलने जैसे मुद्दे शामिल हैं। इसके बदले आर्थिक प्रतिबंधों में राहत और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की बात कही गई है।
ईरान ने प्रस्ताव ठुकराया
हालांकि, ईरान ने इस प्रस्ताव को फिलहाल खारिज कर दिया है और अपनी शर्तों पर कायम है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि प्रस्ताव जमीनी स्थिति से मेल नहीं खाता और इसका उद्देश्य दबाव बनाना है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि जब तक उसकी शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक जवाबी कार्रवाई जारी रहेगी।
UN की शांति पहल तेज
इस बीच संयुक्त राष्ट्र ने भी स्थिति को गंभीर मानते हुए शांति प्रयास तेज किए हैं। UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अनुभवी राजनयिक जीन अर्नो को विशेष दूत नियुक्त किया है, जो विभिन्न पक्षों के बीच बातचीत कर हालात सामान्य करने की कोशिश करेंगे।
वैश्विक असर की आशंका
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक स्तर पर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट पर स्थिति बिगड़ने से तेल आपूर्ति, महंगाई और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हो सकता है। फिलहाल ईरान का यह फैसला कुछ हद तक राहत देने वाला माना जा रहा है।