नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण सोमवार से शुरू हो रहा है और इसके हंगामेदार रहने के आसार हैं। सत्र के दौरान मिडिल-ईस्ट में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव पर सरकार की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर दोनों सदनों में बयान देंगे। विदेश मंत्री राज्यसभा में सुबह 11 बजे और लोकसभा में दोपहर 12 बजे पश्चिम एशिया की स्थिति पर सरकार का पक्ष रखेंगे।
लोकसभा स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा संभव
सत्र के दौरान लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को हटाने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हो सकती है। कांग्रेस समेत विपक्ष के 118 सांसदों ने 10 फरवरी को लोकसभा सचिवालय को नोटिस सौंपा था। विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर सदन की कार्यवाही में निष्पक्षता नहीं बरत रहे और विपक्षी सदस्यों को बोलने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया जाता।
प्रस्ताव पास होना मुश्किल
हालांकि मौजूदा लोकसभा में एनडीए के पास करीब 290 से अधिक सांसदों का समर्थन है, इसलिए प्रस्ताव के पारित होने की संभावना कम मानी जा रही है। नियमों के मुताबिक स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव साधारण बहुमत से पारित होता है। चर्चा और मतदान के दौरान स्पीकर स्वयं सदन की अध्यक्षता नहीं करेंगे। उनकी जगह डिप्टी स्पीकर या अन्य सदस्य कार्यवाही संचालित करेंगे।
विपक्ष ने मिडिल-ईस्ट मुद्दे पर बहस की मांग की
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि सरकार को केवल बयान देने के बजाय पश्चिम एशिया की स्थिति पर संसद में विस्तृत बहस करानी चाहिए। उन्होंने कहा कि मंत्री के बयान से सांसदों को सवाल पूछने या स्पष्टीकरण मांगने का अवसर नहीं मिलता। विपक्ष इस मुद्दे पर पूर्ण चर्चा की मांग कर रहा है।
टीएमसी भी विपक्ष के साथ
सूत्रों के अनुसार तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों ने स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव पर साइन नहीं किए हैं, लेकिन पार्टी अध्यक्ष के निर्देश के अनुसार वे विपक्ष का समर्थन कर सकते हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने सांसदों को 9 और 10 मार्च के लिए तीन लाइन व्हिप जारी कर सदन में उपस्थित रहने को कहा है।
स्पीकर को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 94(c) के तहत लोकसभा को अधिकार है कि वह बहुमत से प्रस्ताव पारित कर स्पीकर को पद से हटा सकती है। इसके लिए कम से कम 14 दिन पहले लिखित नोटिस देना आवश्यक होता है। चर्चा के दौरान स्पीकर सदन में सदस्य के रूप में मौजूद रह सकते हैं, लेकिन कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं करते।