Nepal Janata Party's Election Strategy

नेपाल जनता पार्टी की 2026 चुनाव रणनीति: हिंदुत्व के नाम पर सत्ता में बड़ा दांव

नेपाल जनता पार्टी का लक्ष्य हिंदुत्व समर्थक विचारधारा और मजबूत मौजूदगी के साथ नेपाल के 2026 के आम चुनावों में बड़ी जीत हासिल करना है। हाल की सफलताओं के बाद पार्टी का लक्ष्य देश में ज़्यादा पहुंच बनाना

By : स्वदेश डेस्क
नेपाल जनता पार्टी की 2026 चुनाव रणनीति: हिंदुत्व के नाम पर सत्ता में बड़ा दांव

उमेश सिंह, भोपाल

नेपाल में पहले वामपंथी और केंद्र-लेफ्ट पार्टियां हावी थीं, वहीं अब नेपाल जनता पार्टी (NJP) अपने संगठनात्मक विस्तार और हिंदुत्व आधारित राजनीति के साथ 2026 के आम चुनाव में अपनी किस्मत आजमाने के लिए तैयार है। भले ही यह पार्टी अब तक राष्ट्रीय राजनीति में एक मामूली खिलाड़ी रही हो, लेकिन पिछले साल के स्थानीय चुनावों में 17 सीटें जीतकर इसने खुद को एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया है। अब NJP अपनी रणनीति को और आगे बढ़ाते हुए अगले चुनाव में अपनी पकड़ बढ़ाने की योजना बना रही है।

हिंदुत्व आधारित राजनीति का बढ़ता प्रभाव

NJP के वरिष्ठ उपाध्यक्ष Khem Nath Acharya ने हाल ही में दिल्ली यात्रा के दौरान भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं से मुलाकात की थी, जिसमें भाजपा के पूर्व अध्यक्ष जेपी नड्डा, राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) B. L. Santhosh और केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के साथ बातचीत की। इस यात्रा में उन्होंने नेपाल की तथाकथित “धार्मिक तटस्थता” पर सवाल उठाया और हिंदू पहचान को बहाल करने की आवश्यकता की बात की। पार्टी के नेता इसे सिर्फ एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक सामाजिक-सांस्कृतिक आंदोलन के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं, जो नेपाल के गणराज्य व्यवस्था में हिंदू पहचान को महत्व देने की बात करता है।

नए चुनावी मैदान में बढ़ी उम्मीदें

NJP के नेता इस समय अपना संगठनात्मक विस्तार करने में जुटे हुए हैं। पार्टी ने खुद को सिर्फ चुनावी दल के रूप में नहीं, बल्कि एक आंदोलन के रूप में पेश किया है, जिसका उद्देश्य नेपाल में हिंदू पहचान को पुनः स्थापित करना है। संगठन के अंदर गतिविधियों में इज़ाफा हुआ है और पार्टी ने अपने पूरे नेटवर्क को सक्रिय कर लिया है। हालांकि, नेपाल 2008 से एक धर्मनिरपेक्ष गणराज्य है, लेकिन पार्टी के नेता मानते हैं कि नेपाल में हिंदू बहुल समाज होने के बावजूद उनकी धार्मिक पहचान को खुलकर व्यक्त करने में समाज का एक बड़ा हिस्सा संकोच करता है।

नेपाल के चुनावी परिदृश्य में अन्य प्रमुख दल

नेपाल की राजनीति में बेशक बदलाव की आहट सुनाई दे रही है, लेकिन बाकी प्रमुख राजनीतिक दल भी आगामी चुनावों के लिए अपनी तैयारियों को गति दे रहे हैं। राष्ट्रवादी स्वतंत्र पार्टी (RSP) के नेता बलेंद्र शाह (Balen) ने हाल ही में काठमांडू नगर निगम के मेयर के रूप में सफलता प्राप्त की और अब वह प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में मैदान में हैं। उन्हें झापा जिले में पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के खिलाफ चुनौती का सामना करना पड़ेगा, जहां उनका नाम बड़ा माना जाता है।नेपाल कांग्रेस पार्टी (NCP) के अध्यक्ष गगन थापा भी अपने दल को नेतृत्व दे रहे हैं, जबकि कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (UML) के नेता केपी शर्मा ओली फिर से अपनी राजनीतिक विरासत को संजोने की कोशिश कर रहे हैं। 

बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और अच्छे शासन की तलाश

नेपाल में चुनावी माहौल गर्म है और विभिन्न दलों के घोषणापत्रों में प्रमुख मुद्दे भी उभरकर सामने आए हैं। भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, और बेहतर शासन के लिए सभी दल जोर दे रहे हैं। खासतौर पर जनरेशन Z (14 से 29 साल के युवा) में भारी असंतोष है, जो पिछले साल के विरोध प्रदर्शनों का मुख्य कारण बना। प्रदर्शन में 77 लोगों की जान गई थी, और कई सरकारी भवनों को आग के हवाले कर दिया गया था। इस घटना ने नेपाल के राजनीतिक परिदृश्य को न केवल हिला दिया, बल्कि चुनावी मुद्दों को भी प्रभावित किया है। 

नेपाल की राजनीति पर बाहरी प्रभाव

नेपाल का चुनावी परिदृश्य केवल आंतरिक राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके बाहरी आयाम भी हैं। भारत, जो नेपाल का पारंपरिक पड़ोसी है, ने पहले ओली सरकार के समय में चीन के साथ करीबी संबंधों की आलोचना की थी। अब भारतीय नेतृत्व नेपाल में किसी भी सरकार को देखना चाहता है जो भारत के साथ अच्छे रिश्ते बनाए रखे। वहीं, चीन और अमेरिका भी नेपाल की राजनीति में अपनी सशक्त उपस्थिति बनाए रखने के लिए प्रयासरत हैं। खासकर बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के संदर्भ में भारत और चीन दोनों ही नेपाल में अपनी रणनीतिक दखल बढ़ाने के लिए बेहद सक्रिय हैं।
 

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