ब्रिजेश मिश्रा/अंकित पाण्डेय, गौरीगंज (अमेठी): गौरीगंज विधानसभा क्षेत्र में 2027 के चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के तीन विधायकों के भाजपा में शामिल होने के प्रस्तावित कार्यक्रम ने क्षेत्र की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। इस घटनाक्रम के बीच पूर्व विधायक चंद्र प्रकाश मटियारी की राजनीतिक सक्रियता और क्षेत्र में उनकी पकड़ भी चर्चा के केंद्र में है। अब सवाल यह है कि पार्टी में नए नेताओं की एंट्री के बाद भाजपा का चुनावी समीकरण क्या होगा और गौरीगंज से टिकट की दौड़ किस दिशा में आगे बढ़ेगी।
14 अक्टूबर को गौरीगंज में प्रस्तावित भाजपा के सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम को राजनीतिक लिहाज से अहम माना जा रहा है। विधायक राकेश प्रताप सिंह के मुताबिक, इस कार्यक्रम में गौरीगंज से सपा विधायक राकेश प्रताप सिंह, गोसाईगंज के विधायक अभय प्रताप सिंह और कालपी के विधायक विनोद चतुर्वेदी भाजपा की सदस्यता ग्रहण करेंगे। कार्यक्रम में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, अमेठी की पूर्व सांसद स्मृति ईरानी और कई मंत्रियों के शामिल होने की भी बात कही जा रही है।
तीनों विधायक पिछले विधानसभा चुनाव में सपा के टिकट पर जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। ऐसे में उनके भाजपा में शामिल होने से अवध और बुंदेलखंड की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इस बदलाव का चुनावी असर कितना होगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
गौरीगंज में क्यों चर्चा में है मटियारी फैक्टर?
गौरीगंज की राजनीति में चंद्र प्रकाश मटियारी का नाम पुराना है। बसपा के पूर्व विधायक मटियारी ने 2004 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में उन्हें 99,326 वोट मिले थे और वह दूसरे स्थान पर रहे थे। इसके बाद 2007 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बसपा के टिकट पर कांग्रेस प्रत्याशी मोहम्मद नईम को 5,988 मतों से हराकर जीत दर्ज की थी।
2022 के विधानसभा चुनाव में भी मटियारी चुनाव मैदान में थे, लेकिन इस बार जीत उनसे दूर रह गई। इसके बावजूद उन्होंने क्षेत्र में अपनी सक्रियता बनाए रखी। बताया जाता है कि वह 2022 से लगातार प्रत्येक रविवार को लोगों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनते और उनके समाधान का प्रयास करते रहे हैं। उनकी इसी सक्रियता के आधार पर समर्थक आगामी विधानसभा चुनाव में उनकी भूमिका को अहम मान रहे हैं।
भाजपा में नए चेहरों की एंट्री से टिकट का सवाल अहम
प्रस्तावित सदस्यता कार्यक्रम के बीच गौरीगंज में भाजपा के संभावित उम्मीदवार को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। चंद्र प्रकाश मटियारी का कहना है कि क्षेत्र की जनता उन्हें विधायक के रूप में देखना चाहती है और वह लगातार जनता की सेवा में जुटे हैं। उनके मुताबिक, भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के आशीर्वाद से ही वह अगला चुनाव लड़ेंगे। मटियारी ने भाजपा के बढ़ते कुनबे को सकारात्मक बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प का भी उल्लेख किया।
2027 में किसकी राह होगी आसान?
गौरीगंज में भाजपा की बढ़ती राजनीतिक गतिविधियों के बीच कई सवाल सामने हैं। क्या भाजपा पुराने दावेदारों पर भरोसा जताएगी या नए राजनीतिक समीकरणों के आधार पर उम्मीदवार तय करेगी? पार्टी में नए नेताओं के आने के बाद स्थानीय कार्यकर्ताओं और पहले से टिकट की दावेदारी कर रहे नेताओं की भूमिका क्या होगी? दूसरी ओर, सपा संभावित राजनीतिक नुकसान की भरपाई के लिए किस रणनीति के साथ मैदान में उतरेगी, इस पर भी नजर रहेगी।
बसपा की ओर से संभावित उम्मीदवार और उसका परंपरागत मतदाता आधार भी चुनावी मुकाबले को प्रभावित कर सकता है। जातीय समीकरण, स्थानीय मुद्दे, संगठन की सक्रियता और उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़ जैसे कारक निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। फिलहाल, 14 अक्टूबर के प्रस्तावित कार्यक्रम से गौरीगंज की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। हालांकि, भाजपा के उम्मीदवार और अन्य दलों की रणनीति को लेकर अभी कोई अंतिम तस्वीर सामने नहीं आई है। ऐसे में 2027 का चुनावी मुकाबला किस करवट बैठेगा, यह आने वाले महीनों में होने वाले राजनीतिक फैसलों और जमीनी समीकरणों से तय होगा।