बृजेश मिश्रा, अमेठी: मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों की बेटियों की शादी सम्मानपूर्वक कराना है, लेकिन अमेठी में आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। कार्यक्रम के दौरान सामने आए वीडियो और लाभार्थियों के बयानों ने आयोजन की तैयारियों तथा जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। लाभार्थियों का आरोप है कि वे घंटों तक भूखे-प्यासे खड़े रहे, लेकिन उन्हें भोजन, पानी और पत्तल तक नहीं मिल सकी। दूसरी ओर, वीडियो में कुछ अधिकारी आराम से बैठकर भोजन करते दिखाई देने का दावा किया जा रहा है।
सरकारी आयोजन में लाभार्थियों की फजीहत
कार्यक्रम में अव्यवस्था को लेकर लाभार्थियों में नाराजगी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि जब सरकारी योजना के तहत शादी समारोह आयोजित किया जा रहा है और इसमें सरकारी धन खर्च हो रहा है, तो फिर लाभार्थियों के लिए बुनियादी इंतजाम क्यों नहीं किए गए? आयोजन में शामिल होने आए लोगों को यदि पानी, भोजन और बैठने जैसी सुविधाओं के लिए भी परेशान होना पड़े, तो व्यवस्थाओं की निगरानी करने वाले अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
'हम सबका पैसा, लेकिन हमारे लिए ही कोई व्यवस्था नहीं'
लाभार्थी परवीन कुमार ने आयोजन की व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह सब जनता के पैसे से हो रहा है, लेकिन जरूरतमंदों के लिए ही उचित व्यवस्था नहीं की गई। उनका आरोप है कि सरकारी अमला आराम से बैठकर भोजन कर रहा है, जबकि लाभार्थियों को भोजन तक नसीब नहीं हो रहा। उनके बयान ने आयोजन में मौजूद लोगों और अधिकारियों के बीच व्यवस्थाओं को लेकर कथित अंतर पर सवाल खड़े किए हैं।
सुबह से इंतजार, न पानी मिला और न भरपेट भोजन
प्रेमा देवी ने भी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि वह सुबह से शादी समारोह में आई हैं। एक घंटे से अधिक समय तक खड़े रहने के बावजूद उन्हें भोजन नहीं मिल पाया। उनका आरोप है कि न पानी की समुचित व्यवस्था है और न ही भोजन वितरण की। उन्होंने कहा कि बर्तनों में सब्जी, पूरी, चावल और दाल तक उपलब्ध नहीं थी। प्रेमा देवी के मुताबिक, लाभार्थी परेशान होते रहे, जबकि पीछे जिम्मेदार अधिकारी आराम से बैठकर भोजन कर रहे थे। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर उनकी परेशानी सुनने वाला कौन है?
एक घंटे तक पत्तल का इंतजार, फिर भी नहीं मिला भोजन
निर्मला देवी ने बताया कि वह करीब एक घंटे से पत्तल मिलने का इंतजार कर रही थीं। संबंधित लोगों से पूछने पर उन्हें बार-बार यही जवाब मिलता रहा कि अभी मिल जाएगा। लेकिन काफी देर तक इंतजार करने के बावजूद पत्तल की व्यवस्था नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में उन्हें बिना भोजन किए ही घर लौटने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। उनका बयान भोजन वितरण की व्यवस्था और मौके पर निगरानी के दावों पर सवाल खड़ा करता है।
डेढ़ घंटे से ज्यादा इंतजार, प्यासी और भूखी रहने का आरोप
मोनिका ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि उन्हें डेढ़ घंटे से अधिक समय हो गया, लेकिन न पत्तल मिली और न ही पानी की समुचित व्यवस्था हो सकी। उन्होंने बताया कि वह सुबह से प्यासी बैठी थीं। भोजन की लाइन में पहुंचने के बाद भी उन्हें पत्तल नहीं मिली। उनका आरोप है कि व्यवस्था के बारे में पूछने पर उन्हें इंतजार करने के लिए कहा जाता रहा, लेकिन भोजन उपलब्ध नहीं कराया गया। मोनिका के मुताबिक, सुबह से भूखी रहने के बाद उन्हें मजबूरन बिना भोजन किए घर लौटना पड़ सकता है।
पहले से शादीशुदा जोड़ों के शामिल होने के दावे ने भी खड़े किए सवाल
कार्यक्रम को लेकर एक अन्य गंभीर सवाल कुछ ऐसे जोड़ों की मौजूदगी को लेकर उठाया गया है, जिनकी पहले ही शादी हो चुकी होने का दावा किया जा रहा है। सामने आई तस्वीरों में एक महिला गोद में करीब एक साल का बच्चा लिए खड़ी दिखाई देने की बात कही जा रही है। हालांकि, केवल तस्वीर के आधार पर महिला की वैवाहिक स्थिति या योजना के तहत पात्रता पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इस मामले में संबंधित अभिलेखों की जांच और अधिकारियों का पक्ष सामने आना जरूरी है।
सवाल सिर्फ अव्यवस्था का नहीं, सरकारी धन और निगरानी का भी
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत आयोजित कार्यक्रम में यदि लाभार्थियों को भोजन और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा, तो यह आयोजन की तैयारी और निगरानी की गंभीर समीक्षा की मांग करता है। वहीं, पहले से शादीशुदा जोड़ों के शामिल होने के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि पात्रता, चयन प्रक्रिया और सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब मिल सके।
अब सवाल यह है कि आयोजन की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों ने व्यवस्थाओं की निगरानी कैसे की? भोजन और पानी का इंतजाम करने वाले जिम्मेदारों से जवाब-तलब होगा या नहीं? लाभार्थियों की शिकायतों और वीडियो में सामने आए दृश्यों की जांच कराई जाएगी या नहीं? योजना का लाभ लेने पहुंचे परिवारों को हुई परेशानी के लिए जिम्मेदारी तय होगी या नहीं? फिलहाल, लाभार्थियों के आरोपों, वीडियो में दिखाई देने वाले दृश्यों और कथित अनियमितताओं की आधिकारिक पुष्टि तथा संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।