दिल्ली हाईकोर्ट ने कुलदीप सेंगर की सजा पर रोक से किया इनकार

दिल्ली हाईकोर्ट ने कुलदीप सेंगर की सजा पर रोक से किया इनकार

दिल्ली हाईकोर्ट ने कुलदीप सेंगर की सजा निलंबन याचिका खारिज की। उन्नाव रेप पीड़ित के पिता की कस्टोडियल मौत में 10 साल की सजा बरकरार

By : Swadesh Bhopal
दिल्ली हाईकोर्ट ने कुलदीप सेंगर की सजा पर रोक से किया इनकार

उन्नाव रेप पीड़ित के पिता की कस्टोडियल मौत में 10 साल की सजा बरकरार

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को पूर्व विधायक और रेपिस्ट कुलदीप सिंह सेंगर की सजा निलंबन याचिका खारिज कर दी। सेंगर को उन्नाव रेप पीड़ित के पिता की पुलिस हिरासत में मौत मामले में ट्रायल कोर्ट ने 10 साल कठोर कारावास और 10 लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य हिरासत में मौत का शिकार हुआ है, ऐसे मामलों में कोई नरमी नहीं बरती जा सकती. सेंगर के भाई अतुल सिंह सेंगर और पांच अन्य लोगों को भी 10 साल की जेल की सजा दी गई थी। इसी फैसले के खिलाफ सेंगर ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

सेंगर की दलील और पीड़ित पक्ष का विरोध

सेंगर ने दलील दी कि वह इस केस में लगभग 9 साल जेल में रह चुका है और अब केवल 11 महीने की सजा शेष है. वहीं पीड़ित परिवार की ओर से वकील महमूद प्राचा ने सख्त विरोध किया, उन्होंने कोर्ट को बताया कि अगर सेंगर को जमानत मिल गई तो पीड़ित और उसके परिवार को खतरा है दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले भी 23 दिसंबर को सेंगर को बेल दी थी। इसके विरोध में पीड़ित परिवार और सामाजिक संगठन सड़क पर उतर आए थे। सुप्रीम कोर्ट ने बाद में हाईकोर्ट के बेल फैसले पर रोक लगा दी थी।

मामले का इतिहास

उन्नाव रेप पीड़ित के पिता को 2018 में हथियार रखने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। जेल में उनकी हालत बिगड़ गई और बाद में उनकी मौत हो गई. परिजनों का आरोप था कि यह कोई सामान्य मौत नहीं थी, बल्कि साजिश के तहत की गई कस्टोडियल डैथ थी इस गंभीर मामले की जांच CBI को सौंपी गई। जांच के बाद सेंगर और अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई। लंबी सुनवाई के बाद निचली अदालत ने सेंगर को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी।

हाईकोर्ट ने क्यों नकारा सजा निलंबन

दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि मामला बेहद गंभीर है। इसमें प्रभावशाली व्यक्ति द्वारा कानून का दुरुपयोग किया गया. कोर्ट ने पीड़ित और उसके परिवार को न्याय दिलाने के लिए कठोर रुख अपनाने की आवश्यकता जताई और कहा कि सजा निलंबन का आधार पर्याप्त नहीं है, इसलिए सेंगर को राहत नहीं दी जा सकती।

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