बृजेश मिश्रा, अमेठी: प्रशासनिक जिम्मेदारी, तकनीकी शिक्षा और विकास की नई सोच के साथ जिलाधिकारी शशांक चौधरी अमेठी में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। भारतीय प्रशासनिक सेवा के 2017 बैच के अधिकारी चौधरी ने 22 सितंबर 2026 को अमेठी के जिलाधिकारी का कार्यभार संभाला। आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा पहले ही प्रयास में 130वीं रैंक के साथ उत्तीर्ण की। अब जिले में उनकी प्राथमिकताओं में जनशिकायतों का निस्तारण, स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था में सुधार, औद्योगिक निवेश तथा रोजगार के अवसर बढ़ाना शामिल है।
IIT दिल्ली से सिविल सेवा तक का सफर
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक के बाद गणित के अध्यापक के रूप में भी किया काम। शशांक चौधरी ने वर्ष 2014 में आईआईटी दिल्ली से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। इसके बाद उन्होंने गणित के अध्यापक के रूप में भी काम किया। सिविल सेवा में आने के लिए उन्होंने यूपीएससी की तैयारी की और पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की। 130वीं रैंक के साथ चयनित होकर उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा में जगह बनाई।
कई महत्वपूर्ण पदों पर संभाल चुके हैं जिम्मेदारी
अमरोहा और कानपुर में संयुक्त मजिस्ट्रेट, मेरठ में सीडीओ और मथुरा-वृंदावन में नगर आयुक्त रहे। प्रशासनिक सेवा के दौरान चौधरी संयुक्त मजिस्ट्रेट के रूप में अमरोहा और कानपुर नगर में तैनात रहे। मेरठ में मुख्य विकास अधिकारी और मथुरा-वृंदावन में नगर आयुक्त की जिम्मेदारी भी संभाली। अमेठी आने से पहले वह Invest UP और उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) में अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी के पद पर कार्यरत थे।
366 एकड़ के औद्योगिक हब से निवेश की उम्मीद
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक गतिविधियों को विस्तार देने की योजना पर काम। अमेठी में औद्योगिक निवेश और रोजगार सृजन को लेकर 366 एकड़ में औद्योगिक हब विकसित करने की योजना भी चर्चा में है। इसका उद्देश्य जिले में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देना और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर तैयार करना है।
जनशिकायतों से अस्पतालों तक प्रशासन की निगरानी
समयबद्ध शिकायत निस्तारण और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार को प्राथमिकता। जिलाधिकारी ने कार्यभार संभालने के बाद जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया और मरीजों से बातचीत कर स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति जानी। शिकायतों के 24 घंटे से कम समय में निस्तारण की पहल भी चर्चा में रही। इसके अलावा सरकारी विद्यालयों की स्थिति सुधारने, विकास योजनाओं को गति देने और सरकारी सेवाओं को आम लोगों तक बेहतर तरीके से पहुंचाने पर जोर है।
अमेठी में कार्यकाल की असली कसौटी होंगे विकास के परिणाम
औद्योगिक निवेश, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास के मोर्चे पर जनता की रहेंगी निगाहें। जिलाधिकारी के सामने जिले की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को मजबूत करने की चुनौती है। औद्योगिक निवेश को धरातल पर उतारना, युवाओं को रोजगार से जोड़ना, सरकारी अस्पतालों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना और विद्यालयों की गुणवत्ता सुधारना ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर उनके कार्यकाल का आकलन होगा। अब देखना होगा कि प्रशासनिक योजनाएं किस गति से जमीन पर उतरती हैं और उनका लाभ आम लोगों तक कितना पहुंचता है।