हलाला-तीन तलाक का दुरुपयोग नामंजूर

हलाला और तीन तलाक के दुरुपयोग पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हलाला और तीन तलाक की आड़ में महिला यौन शोषण के मामलों में कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने सभी एफआईआर रद्द करने की याचिकाएं खारिज कीं।

By : नरेंद्र कुमार
हलाला और तीन तलाक के दुरुपयोग पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त

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प्रयागराज स्थित इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने निकाह, हलाला और तीन तलाक जैसी सामाजिक प्रथाओं के कथित दुरुपयोग को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि इनकी आड़ में किसी भी महिला का यौन शोषण स्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि ऐसे कृत्य भारतीय संविधान के मूल सिद्धांतों, लैंगिक समानता और मानवीय गरिमा के पूरी तरह विपरीत हैं।

'आधुनिक समाज पर काला पन्ना' बताया

न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने कहा कि निकाह, हलाला और तीन तलाक जैसी प्रथाओं का दुरुपयोग आधुनिक समाज पर एक "काला पन्ना" है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पर्सनल लॉ या व्यक्तिगत कानूनों की आड़ लेकर किसी भी आपराधिक कृत्य या महिला के यौन शोषण को वैध नहीं ठहराया जा सकता।

एफआईआर रद्द करने की मांग ठुकराई

उच्च न्यायालय ने आरोपियों की एफआईआर रद्द करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने संबंधी सभी याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला हलाला के नाम पर एक नाबालिग लड़की के साथ किए गए गंभीर सामूहिक दुष्कर्म और यौन शोषण से जुड़ा प्रतीत होता है, जिसकी निष्पक्ष और गहन जांच आवश्यक है।

'आपराधिक कानून सर्वोपरि'

खंडपीठ ने कहा कि जब मामला आपराधिक कानून का हो, तब विवाह या पारिवारिक मामलों को नियंत्रित करने वाले पर्सनल लॉ की दलीलों के लिए अदालत में कोई स्थान नहीं है, जब तक कि कानून स्वयं कोई विशेष छूट न देता हो। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच के शुरुआती चरण में अपने रिट अधिकार क्षेत्र का उपयोग कर मुकदमे को समाप्त करना उचित नहीं होगा।

क्या है पूरा मामला

मामला उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के सैदनागली थाना क्षेत्र का है। पीड़िता का आरोप है कि नाबालिग अवस्था में उसका निकाह कराया गया। इसके बाद उसे तीन तलाक दिया गया और फिर हलाला के नाम पर दोबारा निकाह कराने के बहाने उसके साथ लगातार सुनियोजित तरीके से सामूहिक दुष्कर्म और गंभीर यौन शोषण किया गया। इस मामले में पीड़िता के पूर्व पति, उसके सगे चाचा और एक स्थानीय मौलाना को आरोपी बनाया गया है। सभी आरोपियों ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में एफआईआर रद्द करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की थी, जिसे अदालत ने अस्वीकार कर दिया।

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