मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले के इटारसी में आयोजित अखिल भारतीय किन्नर सनातन सम्मेलन अचानक सुर्खियों में आ गया। त्रिशालानंद गार्डन में हुए इस आयोजन में देशभर से बड़ी संख्या में किन्नर समुदाय के लोग शामिल हुए, जहां वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच सात किन्नरों की सनातन धर्म में ‘घर वापसी’ कराई। कार्यक्रम में दूध, घी और शहद से शुद्धिकरण अभिषेक के बाद इन किन्नरों को पुनः सनातन परंपरा में शामिल किए जाने की बात सामने आई, जिसने पूरे क्षेत्र में चर्चा है।
महामंडलेश्वर की उपाधि और धार्मिक दावे
इस आयोजन का नेतृत्व जगत गुरु काजल ठाकुर किन्नर ने किया। उनके सान्निध्य में मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए सात किन्नरों को महामंडलेश्वर की उपाधि भी प्रदान की गई। इनमें नर्मदापुरम की पांचाली गुरु, पिपरिया की शांति, मुंगावली की डॉली नायक, इटावा की बेला नायक और अन्य शामिल हैं। आयोजकों का दावा है कि ये सभी पहले दूसरे धर्म से जुड़े थे और अब उन्होंने सनातन धर्म को अपनाया है। कार्यक्रम के दौरान इसे “धार्मिक पुनर्जागरण” और “सांस्कृतिक वापसी” का नाम दिया गया।
काजल ठाकुर का दावा
जगत गुरु काजल ठाकुर किन्नर ने कहा कि यह केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि किन्नर समाज को उसकी जड़ों से जोड़ने का प्रयास है। उनके अनुसार, सनातन ग्रंथों में किन्नरों का उल्लेख मिलता है, और इसी आधार पर यह पहल की जा रही है। वहीं, पांचाली गुरु किन्नर ने दावा किया कि उन्हें पहले दबाव में धर्म परिवर्तन कराया गया था और अब वे स्वेच्छा से सनातन धर्म में लौट आई हैं। इटारसी का यह सम्मेलन अब धार्मिक सीमाओं से आगे बढ़कर एक बड़े सामाजिक विमर्श का विषय बन गया है।