World’s Largest Natural Shivling in Jashpur, Madhe

जशपुर में है विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग, सैकड़ों वर्षों से हो रही पूजा

जशपुर के मधेश्वर पहाड़ पर स्थित विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग, गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज, महाशिवरात्रि पर उमड़ेगी भीड़

By : नरेंद्र कुमार
जशपुर में है विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग, सैकड़ों वर्षों से हो रही पूजा

मधेश्वर पर आज लगेगा श्रद्धालुओं का तांता, गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज

छत्तीसगढ़ के जशपुर जिला में स्थित मधेश्वर पहाड़ को लेकर आस्था और रहस्य दोनों जुड़े हैं। जशपुर जिले के मयाली गांव से करीब 35 किलोमीटर दूर स्थित मधेश्वर पहाड़ ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में विश्व के सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग (Largest Natural Facsimile of Shivling) के रूप में दर्ज है।

मधेश्वर पहाड़ न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि अब यह पर्वतारोहण और एडवेंचर स्पोर्ट्स के शौकीनों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है। आदिवासी समाज समेत अन्य समुदायों के लोग सैकड़ों वर्षों से इस प्राकृतिक शिवलिंग की पूजा करते आ रहे हैं। महाशिवरात्रि के मौके पर रविवार को यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है।

1924 में हुई थी मंदिर की स्थापना

मधेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना वर्ष 1924 में हुई थी। वर्तमान में यहां पुजारियों की चौथी पीढ़ी पूजा-अर्चना कर रही है। पहले इस स्थल पर मुख्य रूप से प्रदेश के श्रद्धालु ही पहुंचते थे, लेकिन जब से इसे विश्व के सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग का दर्जा मिला है, तब से इसकी ख्याति देशभर में फैल गई है।

पर्वत के नीचे गुफा, जिसकी गहराई आज तक नापी नहीं जा सकी

मधेश्वर पर्वत के नीचे स्थित एक प्राचीन गुफा भी श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र है। इस गुफा में सैकड़ों साल पुराना मंदिर है, जहां स्वयंभू शिवलिंग रूप में भगवान शिव विराजमान हैं। स्थानीय मान्यता है कि इस गुफा की गहराई आज तक कोई नहीं नाप पाया है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। विशेष रूप से बीमारियों से पीड़ित लोग यहां पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय कर रहे हैं विशेष प्रयास

मधेश्वर पर्वत को पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की ओर से विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। यहां समय-समय पर धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है। मुख्यमंत्री स्वयं इसी जिले से आते हैं, उनका गांव बगिया भी जशपुर जिले में ही स्थित है।

स्वदेश दर्शन योजना के तहत मधेश्वर महादेव धाम और पहाड़ के विकास व सौंदर्यीकरण के लिए कार्य चल रहे हैं। केंद्र सरकार से इसके लिए 10 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई है, जिसे विशेष रूप से धार्मिक और पर्यटन सुविधाओं के विकास में खर्च किया जा रहा है। इससे आने वाले समय में मधेश्वर धाम देश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में अपनी पहचान और मजबूत कर सकता है।