कान्हा में बाघों के लिए वायरस खतरा

कान्हा में बाघों पर वायरस का खतरा! 8 टाइगरों की मौत के बाद अलर्ट, गांव-गांव कुत्तों का वैक्सीनेशन शुरू

कान्हा टाइगर रिजर्व में सीडीवी वायरस से 8 बाघों की मृत्यु के बाद, वन विभाग ने गांव-गांव कुत्तों के वैक्सीनेशन का अभियान तेज किया।

By : नरेंद्र कुमार
कान्हा में बाघों पर वायरस का खतरा! 8 टाइगरों की मौत के बाद अलर्ट, गांव-गांव कुत्तों का वैक्सीनेशन शुरू

कान्हा टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) वन्यजीव संरक्षण के लिए गंभीर चुनौती बनकर उभरा है। संक्रमण से एक और बाघ की मौत के बाद वर्ष 2026 में इस वायरस के कारण जान गंवाने वाले बाघों की संख्या बढ़कर आठ हो गई है। लगातार हो रही मौतों ने वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।

संक्रमण की रोकथाम के लिए वन विभाग ने कान्हा टाइगर रिजर्व के आसपास स्थित गांवों और बस्तियों में बड़े स्तर पर कुत्तों के वैक्सीनेशन अभियान की शुरुआत की है। अब तक हजारों कुत्तों का टीकाकरण किया जा चुका है, जबकि शेष पशुओं को भी जल्द कवर करने का प्रयास किया जा रहा है।

कैसे फैलता है संक्रमण?

कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) एक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से कुत्तों में पाई जाती है। कुत्तों का शिकार करने वाले बाघ, तेंदुए और अन्य मांसाहारी वन्यजीव भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, जंगल और गांवों के आसपास रहने वाले बिना टीकाकरण वाले कुत्ते इस वायरस के प्रमुख वाहक होते हैं। जब संक्रमित कुत्ते या उनके संपर्क में आए जानवरों का शिकार बाघ या अन्य वन्यजीव करते हैं, तब संक्रमण का चक्र शुरू हो जाता है और धीरे-धीरे यह वन्यजीवों तक पहुंच जाता है।

कान्हा के लिए बड़ी चुनौती बना सीडीवी

साल 2026 में कान्हा टाइगर रिजर्व के लिए यह बीमारी सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन गई है। लगातार सामने आ रहे मामलों ने वन्यजीव संरक्षण की रणनीति पर भी सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते संक्रमण पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो यह बाघों और अन्य वन्यजीवों की आबादी के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकता है।

अन्य टाइगर रिजर्व में भी बढ़ी सतर्कता

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य के अन्य टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में भी कुत्तों के टीकाकरण अभियान को तेज कर दिया गया है। वन विभाग का लक्ष्य जंगलों के आसपास रहने वाले सभी कुत्तों को वैक्सीन लगाकर संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ना है, ताकि बाघों और अन्य वन्यजीवों को इस घातक वायरस से बचाया जा सके।

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