प्रमोद शर्मा,हापुड़: चिकित्सा विज्ञान जिस तेजी से नई राहें तलाश रहा है, उसमें अब शरीर के अंदर मौजूद सूक्ष्मजीवों यानी माइक्रोबायोम पर शोध उम्मीद की नई किरण बनकर उभर रहा है। इसी भविष्य की संभावनाओं पर मंथन करने के लिए सरस्वती कॉलेज ऑफ फार्मेसी, हापुड़ में उत्तर प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (सीएसटी-यूपी), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार के प्रायोजन में एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। “माइक्रोबायोम आधारित चिकित्सीय उपचार : प्रिसीजन मेडिसिन के लिए उभरते अवसर” विषय पर आयोजित सम्मेलन में देशभर से 300 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और पुष्प अर्पित कर हुआ। सरस्वती ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के महाप्रबंधक एन. वर्धराजन, निदेशक रघुवर दत्त और मेडिकल सुपरिंटेंडेंट मेजर जनरल सी.एस. अहलुवालिया की मौजूदगी ने आयोजन की गरिमा बढ़ाई। अतिथियों ने माइक्रोबायोम अनुसंधान को भविष्य की चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं का महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया। फार्मेसी विभाग के प्राचार्य डॉ. नितिन कुमार ने सम्मेलन के अध्यक्ष एवं संयोजक की भूमिका निभाते हुए अतिथियों और वक्ताओं का स्वागत किया। उन्होंने संस्थान की शैक्षणिक उपलब्धियों, शोध गतिविधियों और आगामी अनुसंधान योजनाओं की जानकारी दी। सह-संयोजक डॉ. निधि त्यागी ने आयोजन की विभिन्न गतिविधियों के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
माइक्रोबायोम आधारित दवाओं से लेकर प्रिसीजन मेडिसिन तक चर्चा
सम्मेलन के मुख्य अतिथि फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया की वित्त समिति के अध्यक्ष एवं एल.एल.आर.एम. मेडिकल कॉलेज, मेरठ के फार्मेसी विभागाध्यक्ष ने माइक्रोबायोम आधारित दवाओं और उपचार की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने फार्मेसी शिक्षा में आने वाले नए पाठ्यक्रम, फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के आगामी दृष्टिकोण और मेडिकल डिवाइस क्षेत्र में बढ़ते अवसरों की जानकारी विद्यार्थियों को दी।
मुख्य वक्ता जामिया हमदर्द, नई दिल्ली के स्कूल ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च के फार्मास्युटिकल साइंसेज विभागाध्यक्ष डॉ. जावेद अली ने माइक्रोबायोम, मानव स्वास्थ्य, प्रिसीजन मेडिसिन और फार्मास्युटिकल अनुसंधान के वैज्ञानिक पहलुओं पर विस्तार से व्याख्यान दिया। वहीं डॉ. राजीव टोंक, डॉ. शौकेंद्र कुमार और डॉ. गौरव कैथवास ने भी अपने अनुभव और शोध संबंधी विचार साझा किए। सम्मेलन में 20 से अधिक मौखिक प्रस्तुतियां और 60 से अधिक पोस्टर प्रस्तुतियां हुईं। शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने अपने शोध निष्कर्ष और नए विचार विशेषज्ञों के सामने रखे।
मौखिक प्रस्तुति में जामिया हमदर्द के शोधार्थी अभिषेक त्यागी ने प्रथम स्थान हासिल किया। सरस्वती कॉलेज ऑफ फार्मेसी के बी.फार्मा चतुर्थ वर्ष के अफजल खान और शगुन द्वितीय स्थान पर रहे। पोस्टर प्रस्तुति में विनीत चौधरी ने बाजी मारी, जबकि आर.एस.डी. एकेडमी कॉलेज ऑफ फार्मेसी, मुरादाबाद के उमंग गौर और मानव मिश्रा ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। विजेताओं को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन सहायक आचार्य डिपेश और नेहा वर्मा ने किया। आयोजन की सफलता में डॉ. नेहा सिंह, डॉ. सुप्रियो मैती, डॉ. रश्मि शर्मा, प्रशांत सरस्वत समेत फार्मेसी विभाग के शिक्षकों और कर्मचारियों का योगदान रहा। समापन प्रोफेसर डॉ. अरुण कुमार के धन्यवाद ज्ञापन और राष्ट्रगान के साथ हुआ। संस्थापक एवं अध्यक्ष डॉ. जे. रामचंद्रन तथा उपाध्यक्ष डॉ. रम्या रामचंद्रन ने आयोजन की सफलता पर शुभकामनाएं दीं। सम्मेलन ने हापुड़ में फार्मेसी शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान और भविष्य की प्रिसीजन हेल्थकेयर को लेकर नई बहस और संभावनाओं का रास्ता खोल दिया।