आधुनिक भागदौड़ भरी जिंदगी में बढ़ती बीमारियों के बीच प्राकृतिक जीवनशैली अपनाने की जरूरत पहले से अधिक महसूस की जा रही है। इसी संदर्भ में मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि स्वस्थ जीवन का असली आधार इन्द्रियों पर नियंत्रण और मन का संतुलन है। उन्होंने प्राकृतिक चिकित्सा को न केवल एक चिकित्सा पद्धति, बल्कि जीवन जीने का समग्र दृष्टिकोण बताया।
राज्यपाल सोमवार को बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय के ज्ञान-विज्ञान सभागार में आरोग्य भारती द्वारा आयोजित प्राकृतिक चिकित्सा कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मन स्वभाव से चंचल होता है और इसे नियंत्रित करना ही स्वस्थ और संतुलित जीवन की कुंजी है। उन्होंने कहा कि प्रकृति ने मनुष्य को शरीर को स्वस्थ रखने और बीमार करने दोनों की शक्ति दी है, इसलिए यह व्यक्ति पर निर्भर करता है कि वह किस दिशा में जीवन को ले जाता है। इन्द्रियों पर संयम और अनुशासन अपनाकर व्यक्ति कई रोगों से स्वयं को बचा सकता है।
प्राकृतिक चिकित्सा केवल उपचार नहीं, जीवन दर्शन
राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्राकृतिक चिकित्सा केवल बीमारियों के इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक समग्र जीवन दर्शन है। इसमें जल, वायु, सूर्य, मिट्टी और संतुलित आहार के माध्यम से शरीर की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत किया जाता है। उन्होंने कहा कि यह पद्धति आज की जीवनशैली से जुड़ी समस्याओं, जैसे तनाव, प्रदूषण और गलत खानपान, का सरल, सुरक्षित और प्रभावी समाधान प्रस्तुत करती है।
प्रकृति का स्वास्थ्य पर प्रभाव
राज्यपाल ने गुजरात के डांग क्षेत्र का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां की हरियाली और प्राकृतिक जीवनशैली के कारण जनजातीय समुदाय में सिकल सेल जैसी आनुवांशिक बीमारी के मामले कम देखने को मिलते हैं। यह दर्शाता है कि वातावरण और जीवनशैली का स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव पड़ता है। उन्होंने लोगों को अधिक पानी पीने, तैलीय भोजन से बचने, पर्याप्त नींद लेने और मिलेट्स को आहार में शामिल करने की सलाह दी।
आयुर्वेद और प्रकृति का गहरा संबंध
राज्यपाल ने कहा कि आयुर्वेद प्रकृति आधारित विज्ञान है। इसके उपचार भले धीरे-धीरे असर करते हैं, लेकिन इनके दुष्प्रभाव नहीं होते। उन्होंने बताया कि हमारे पूर्वज ऋतु के अनुसार आहार बदलते थे, जो पूरी तरह वैज्ञानिक था। बदलते मौसम के अनुसार खान-पान और दिनचर्या में बदलाव से शरीर स्वस्थ रहता है।
सरकार की पहल और जनभागीदारी की अपील
राज्यपाल ने बताया कि प्रदेश सरकार पोषण अभियान, आयुष्मान योजना और योग-आधारित स्वास्थ्य शिविरों के जरिए लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है। खासकर ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में कुपोषण कम करने और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए अनेक प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने सभी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्वस्थ समाज, सशक्त राष्ट्र’ के संकल्प को साकार करने में योगदान देने की अपील की। साथ ही नेचुरोपैथी के सिद्धांतों को अपनाकर दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने का आह्वान किया। कार्यशाला में आरोग्य भारती के पदाधिकारियों ने प्राकृतिक चिकित्सा के वैज्ञानिक आधार पर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम के अंत में योग एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ कार्यशाला का समापन हुआ।