MP High Court Security Lapse

MP हाईकोर्ट में सुरक्षा में बड़ी चूक, SI समेत 4 पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज, जानें क्या है पूरा मामला

जबलपुर हाईकोर्ट में सुरक्षा में बड़ी चूक, याचिकाकर्ता बैग में भ्रूण लेकर कोर्ट पहुंचा। मामले के बाद SI समेत 4 पुलिसकर्मी लाइन अटैच, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल।

By : Admin
MP हाईकोर्ट में सुरक्षा में बड़ी चूक, SI समेत 4 पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज, जानें क्या है पूरा मामला

Security Lapse in MP High Court

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच में सोमवार को एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने अदालत परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। रीवा निवासी एक याचिकाकर्ता अपनी पत्नी के मिसकैरेज के बाद तीन महीने पुराने भ्रूण को पॉलीथीन में लपेटकर बैग में रखकर कोर्ट रूम तक पहुंच गया।

बताया गया कि उसने इसे ‘सबूत’ बताते हुए जज की डाइस पर रख दिया और न्याय की गुहार लगाते हुए इच्छामृत्यु की मांग तक कर दी। घटना सामने आते ही कोर्ट परिसर में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

गेट पर बैग चेक नहीं हुआ, सीधे कोर्ट रूम पहुंच गया

जानकारी के मुताबिक यह पूरा मामला गेट नंबर 6 से शुरू हुआ, जहां सुरक्षा जांच के दौरान याचिकाकर्ता के बैग की ठीक से तलाशी नहीं ली गई। इसी चूक का फायदा उठाकर वह सीधे कोर्ट रूम तक पहुंच गया। जब अदालत में बैग खोला गया तो उसमें भ्रूण होने की बात सामने आई, जिसके बाद सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत उसे कब्जे में लिया और व्यक्ति को हिरासत में ले लिया। बाद में सिविल लाइन थाना पुलिस और SAF की टीम भी मौके पर पहुंची।

पत्नी के मिसकैरेज के बाद लेकर आया था भ्रूण

याचिकाकर्ता दयाशंकर पांडे पहले जबलपुर के एक ऑटोमोबाइल शोरूम में अकाउंटेंट के तौर पर काम करता था। उसका आरोप है कि नौकरी के दौरान उसे करीब 200 करोड़ रुपये के वित्तीय घोटाले की जानकारी मिली थी। उसका अनुसार, इस घोटाले के खिलाफ आवाज उठाने के बाद उस पर और उसके परिवार पर हमले होने लगे। 1 मार्च को हुए एक कथित सड़क हादसे में उसकी पत्नी घायल हो गईं, जिसके बाद 8 मार्च को उनका मिसकैरेज हो गया।

दयाशंकर का आरोप है कि पुलिस ने मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, इसी वजह से उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

कोर्ट में इच्छामृत्यु की मांग

सुनवाई के दौरान उसने अदालत में कहा कि “मेरा बच्चा मर चुका है, अब मेरी बारी है। मुझे न्याय दीजिए या इच्छामृत्यु की अनुमति दीजिए।' घटना के बाद पुलिस ने उसे समझाइश दी और भ्रूण को अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया।

सुरक्षा में लापरवाही पर कार्रवाई

इस गंभीर चूक को देखते हुए हाईकोर्ट प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की। सुरक्षा व्यवस्था में तैनात एक सब-इंस्पेक्टर समेत चार पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच कर दिया गया है। साथ ही इस पूरे मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं कि आखिर इतनी संवेदनशील चीज बिना जांच के कोर्ट परिसर तक कैसे पहुंच गई।

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