भोपालः मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दावोस दौरे पर रवाना होने से ठीक पहले प्रदेश में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी देखने को मिली है। रविवार शाम मोहन सरकार ने एक साथ 26 आईएएस अधिकारियों के तबादले कर दिए। इस फेरबदल ने न सिर्फ अफसरशाही में नई जिम्मेदारियां तय कीं, बल्कि कई अहम संकेत भी दिए। इस फेरबदल में सबसे चौंकाने वाला फैसला इंदौर दूषित जल कांड में कमिश्नर पद से हटाए गए दिलीप यादव का है।
सीनियर अफसरों की जिम्मेदारियों में बदलाव
इस तबादला सूची में सबसे चर्चित नाम 1994 बैच के आईएएस अधिकारी शिवशेखर शुक्ला का है। उन्हें अपर मुख्य सचिव, संस्कृति एवं पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व और गृह विभाग के अतिरिक्त प्रभार से हटाकर राजस्व मंडल का अध्यक्ष बनाया गया है। माना जा रहा है कि राजस्व से जुड़े मामलों को और मजबूत करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
वहीं, 1996 बैच के उमाकांत उमराव के प्रभार में भी बदलाव किया गया है। अब वे केवल पशुपालन एवं डेयरी विभाग के प्रमुख सचिव रहेंगे। पहले उनके पास खनिज साधन विभाग की भी जिम्मेदारी थी।
ऊर्जा और स्वास्थ्य विभाग में भी फेरबदल
2008 बैच के विशेष गड़पाले को ऊर्जा विभाग से जुड़ी अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें सचिव, ऊर्जा विभाग के साथ-साथ एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी का प्रबंध संचालक बनाया गया है। सरकार का फोकस साफ है—बिजली व्यवस्था में बेहतर समन्वय।
इसी तरह 2010 बैच के आईएएस तरुण राठी को स्वास्थ्य सेवाओं से हटाकर आयुक्त, आदिवासी विकास बनाया गया है। आदिवासी इलाकों में योजनाओं की रफ्तार बढ़ाने के लिहाज से यह बदलाव अहम माना जा रहा है।
दूषित जलकांड के बाद दिलीप यादव की वापसी
इंदौर के बहुचर्चित दूषित जलकांड के बाद 2 जनवरी को नगर निगम कमिश्नर पद से हटाए गए दिलीप यादव को महज 16 दिन में नई जिम्मेदारी मिल गई है। उन्हें मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम का प्रबंध संचालक बनाया गया है। गौरतलब है कि निगम कमिश्नर पद से हटाने के बाद यादव को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में उप सचिव बनाकर भोपाल भेजा गया था। अब पर्यटन निगम की कमान सौंपे जाने को लेकर प्रशासनिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं।
दावोस दौरे से पहले क्या हैं संकेत
मुख्यमंत्री का दावोस दौरा निवेश और वैश्विक संवाद के लिहाज से अहम माना जा रहा है। ऐसे में इससे ठीक पहले अफसरों के तबादले यह संकेत देते हैं कि सरकार प्रशासनिक ढांचे को नए सिरे से सधा हुआ देखना चाहती है। आने वाले दिनों में इन बदलावों का असर जमीन पर कितना दिखता है, इस पर सभी की नजरें रहेंगी।