उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले एक बार फिर अपने पुराने गौरव की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। धार्मिक पहचान के साथ अब यह शहर विज्ञान और समय की समझ का भी केंद्र बनने की तैयारी में है। शुक्रवार को यहां शुरू हुए आयोजन ने इस दिशा में बड़ा संकेत दे दिया है।
‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ से नई पहचान
उज्जैन में “महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम” थीम पर आधारित प्रदर्शनी और तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की शुरुआत हुई। इस आयोजन का उद्घाटन मोहन यादव, धर्मेंद्र प्रधान और गजेन्द्र सिंह शेखावत ने संयुक्त रूप से किया। वसंत विहार स्थित तारामंडल परिसर में हो रहे इस कार्यक्रम में देश-विदेश के विशेषज्ञ जुटे हैं। ये समय, खगोल विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा पर चर्चा करेंगे।
15.20 करोड़ का अत्याधुनिक साइंस सेंटर
तारामंडल परिसर में बने नए साइंस सेंटर का भी लोकार्पण किया गया। करीब 15.20 करोड़ रुपए की लागत से तैयार इस सेंटर में केंद्र और राज्य सरकार दोनों का योगदान है। यहां छात्रों और शोधार्थियों के लिए इंटरएक्टिव मॉडल, डिजिटल डिस्प्ले और आधुनिक लैब सुविधाएं विकसित की गई हैं। यह सेंटर खास तौर पर खगोल विज्ञान और समय की अवधारणा को आसान तरीके से समझाने के लिए डिजाइन किया गया है।
सिंहस्थ के लिए 701 करोड़ का बायपास
आगामी सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए 19 किलोमीटर लंबे फोर लेन बायपास का भूमिपूजन भी किया गया। करीब 701 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली यह सड़क शहर के ट्रैफिक दबाव को कम करेगी और बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान आवागमन आसान बनाएगी। इसके साथ ही 22 करोड़ रुपए की लागत से विक्रमादित्य हेरिटेज होटल के विस्तार की भी योजना है।
विज्ञान और परंपरा का संगम
इस तीन दिवसीय सम्मेलन में वैज्ञानिक, खगोलविद, नीति-निर्माता और अंतरिक्ष विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। मुख्य उद्देश्य भारतीय पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान के बीच एक संवाद स्थापित करना है। चर्चा में समय की अवधारणा, ब्रह्मांड की संरचना और भविष्य की वैज्ञानिक दिशा जैसे विषय शामिल हैं।
कार्यक्रम में नीति आयोग से जुड़े विशेषज्ञों, इसरो वैज्ञानिकों और जापान सहित कई देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी इसे अंतरराष्ट्रीय स्वरूप दे रही है।