नरेश भारद्वाज, मुरादाबाद: नगर निगम मुरादाबाद में बाबूओं के माकडजाल और उत्पीड़न से आम आदमी तो छोड़िए विभागीय कर्मचारी और उनके परिजन भी परेशान हैं। यह मामला जनपद मुरादाबाद के नगर निगम कार्यालय से जुड़ा है। बताते चले कि करीब 70 वर्षीय उर्मिला देवी अपना अधिकार पाने के लिए वर्षों से नगर निगम के चक्कर लगा रही है, लेकिन बाबूओं की बाबूगिरी के चलते निराश बूढ़ी मां ने अब जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का दरवाजा खटखटाने का मन बनाया है। क्योंकि यहां बात उनके अधिकारों की है और उन्हें उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है।
8 सालों ने नहीं मिली पेंशन
पूरे मामले के अनुसार नमो नारायण उपाध्याय नगर निगम मुरादाबाद में जोनल सेनेटरी अधिकारी के पद पर कार्यरत थे और अपनी सेवा के दौरान वह 31 मई 2012 को सेवानिवृत्त हो गये। उनकी वृद्ध पत्नी उर्मिला देवी ने बताया कि सेवानिवृत्त के उपरांत उनके पति नमो नारायण उपाध्याय की मृत्यु पांच दिसंबर 2018 को हो गई। जिसके बाद वह उनकी पारिवारिक पेंशन की पूरी तरह हकदार हैं और वर्ष 2018 से अब तक आठ वर्षो से वह नगर निगम के सैकड़ों चक्कर लगाते लगाते थक गई है, लेकिन अपने पति की पेंशन जो उनका अधिकार था, उससे उन्हें वंचित कर रखा है।
निगम के चक्कर लगाकर थक चुकी उर्मिला देवी
उर्मिला देवी बताया कि वह नगर निगम के बड़े अधिकारीयों के दफ्तरों में भी गयी लेकिन कार्य व्यस्तता के रहते कभी मुलाकात होती थी और कभी नही, उन्होंने कहा कि अब शरीर भी साथ नहीं देता कि वह नगर निगम के बाबूओं और कार्यालय के चक्कर लगा सके। बताया कि जब भी विभागीय बाबूओं द्वारा हर बार टाल दिया जाता है। जब पूछो तो प्रकिया पूरी होने के उपरांत भुगतान करा दिया जाएगा कहा जाता है,
अब लोक अदालत जाएंगी उर्मिला देवी
उन्होंने कहा कि अब जब नगर निगम और वहां के अधिकारी कोई सुनवाई नहीं कर रहे हैं तो वह जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (लोक अदालत) में जायेंगी। उन्होंने बताया कि उनके एक परिचित अधिवक्ता ने उन्हें बताया है कि लोक अदालत के अध्यक्ष जिला जज होते हैं और वहां त्वरित सुनवाई भी होती है। जिसके रहते अब वह अपने अधिकारों के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से गुहार करेंगी।